नवी मुंबई का एक गांव है जहां लोग हथियारों और विस्फोटकों के ढेर के पास दहशत में जिंदगी गुजार रहे हैं. गांव के बीचोबीच हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा पड़ा है लेकिन न तो बमों को निष्क्रिय किया जा रहा है और न ही इसे गांव से हटाया जा रहा है.
दरअसल ये जखीरा उस कबाड़ का हिस्सा है, जिसे ईराक-ईरान यु्द्ध के बाद आयात किया गया था. इसमें कई जिंदा बम हैं इस वजह से गांव के लोग हमेशा खौफ के साये में रहते हैं. मोसारा गांव में एक कमरे में बंद हथियारों और विस्फोटकों के ढेर की वजह से पूरा गांव दहशत में है. इस कमरे में 50 हथगोले, 1000 से ज्यादा कारतूस, रॉकेट और मोर्टार बम हैं.
सुनकर आप भी चौंक गए, लेकिन यही सच है. ये विस्फोटक अक्टूबर 2004 में एक छापेमारी के दौरान पुलिस को यहां मिले थे. सूत्रों के मुताबिक कई बम अभी भी जिंदा हैं और बड़ा धमाका करने कि क्षमता रखते है. स्थानीय लोगों के मन में हमेशा धमाकों का डर बना रहता है.
गांव के एक स्थानीय निवासी ने बताया, 'यह कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसी जखीरे का एक हिस्सा 2004 में सबसे पहले कबाड़ के बाजार में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मिला था. इसी कबाड़ में काम करते वक्त धमाका हुआ था, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी.'
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन हथियारों को लेकर 7 खत आयुध कारखानों, एनएसजी और सेना को लिखे जा चुके हैं लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं आया. सवाल यही है अगर ये बम फटे, या गलत हाथों में पड़ गए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? आखिर समय रहते कदम क्यों नहीं उठाये जा रहे हैं?