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अलगाववादी संगठन NSCN (IM) और मोदी सरकार के बीच हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता

नागालैंड के अलगाववादी संगठन NSCN (IM) और केंद्र सरकार ने सोमवार शाम को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत किए. NSCN (IM) के साथ सरकार का सीजफायर चल रहा था.

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7, RCR में प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और इसाक मुइवा
7, RCR में प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और इसाक मुइवा

नागालैंड के अलगाववादी संगठन NSCN (IM) और केंद्र सरकार ने सोमवार शाम को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत किए. NSCN (IM) के साथ सरकार का सीजफायर चल रहा था.

इस समझौते पर 7, रेसकोर्स पर हस्ताक्षर हुए. हस्ताक्षर के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, NSCN (IM) के संस्थापक सदस्य इसाक मुइवा, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर मौजूद थे. NSCN (IM) लंबे समय से ग्रेटर नगालैंड की मांग कर रहा था.

 

इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि वो 7 RCR से विशेष ऐलान करेंगे. हालांकि यह किसी ने नहीं सोचा था कि ये ऐलान शांति समझौता होगा.

आज से नए युग का आरंभ: मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए एनएससीएन नेताओं का शुक्रिया अदा किया और कहा नगालैंड में देश के प्रति भ्रम फैलाया गया. उन्होंने इस समझौते के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी क्रेडिट दिया और कहा कि आज से एक नए युग का आरंभ हुआ है.

 

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मोदी ने कहा ऐतिहासिक समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागा संगठन नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आफ नागालैंड (एनएससीएन-आईएम) के साथ हुए शांति समझौते को ऐतिहासिक करार दिया है. समझौते पर दस्तखत के समय मौजूद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नागालैंड का यह राजनैतिक मुद्दा पिछले छह दशकों से खिंचता चला आ रहा था और इसका असर हमारी पीढ़ियों को भुगतना पड़ा.

मोदी ने कहा, 'मेरे मन में शांति प्रयासों को असाधारण समर्थन देने के लिए महान नागा लोगों के प्रति बेहद गहरा सम्मान है. उत्तर पूर्व के लोगों के साथ मेरा रिश्ता बहुत गहरा है. मैं कई बार नागालैंड जा चुका हूं. मैं नागा लोगों की समृद्ध और बहुआयामी संस्कृति और जीवन जीने के उनके अलग अंदाज से बेहद प्रभावित रहा हूं. यह दुर्भाग्य है कि नागा समस्या को सुलझाने में इतना समय लग गया. इसकी वजह यह थी कि हम एक-दूसरे को समझ नहीं पा रहे थे. नागा लोगों का साहस और शौर्य अगर बेमिसाल है तो साथ ही वे उच्च मानवीयता के भी पैरोकार हैं.'

सरकार ने वास्तविक कदम उठाए: एनएससीएन
एनएससीएन-आईएम ने कहा कि नगाओं के विशिष्ट इतिहास पर आधारित प्रारूप वाला समझौता हुआ है जो इस सार्वभौमिक सिद्धांत को मान्यता देता है कि लोकतंत्र में सत्ता जनता के हाथ में होती है. एनएससीएन-आईएम और केंद्र के वार्ताकार द्वारा ऐतिहासिक करार पर दस्तखत के कुछ घंटे बाद नगा अलगाववादी संगठन ने कहा कि जब 11 जुलाई 2002 को नगाओं के विशिष्ट इतिहास और परिस्थिति को समझते हुए बीजेपी सरकार ने वास्तविक कदम उठाये तब भारत के प्रति नगाओं के रख में अत्यधिक बदलाव हुआ और यह मुद्दे के दीर्घकालिक तथा सम्मानजनक राजनीतिक समाधान की आकांक्षा प्रदर्शित करता है.

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करार पर हस्ताक्षर करने वाले एनएससीएन-आईएम के महासचिव टी मुइवा ने एक बयान में कहा, ‘बेहतर समझ बनी है और नगाओं के विशिष्ट इतिहास और स्थिति के आधार पर एक प्रारूप वाला समझौता हुआ है.’ दशकों तक एक अलग संप्रभु नगा क्षेत्र के लिए संघर्ष करते रहे और बाद में इस मुद्दे को छोड़ देने वाले विद्रोही संगठन ने कहा कि दशकों के टकराव और परेशानियों के बाद नगाओं ने भारत सरकार के साथ राजनीतिक संवाद रखने की वकालत की क्योंकि इस बात की स्वीकृति मिली कि सरकार नगा मुद्दे के लिए सैन्य समाधान को अलग रखकर शांतिपूर्ण समाधान निकालने की दिशा में काम करेगी.

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