लॉकडाउन की वजह से देशभर के लाखों प्रवासी मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर चलकर अपने गांव पहुंचना पड़ रहा है. इससे जुड़ी कई चौंकाने वाली तस्वीरें और वीडियो भी इंटरनेट पर शेयर हो रही हैं. ऐसी ही एक तस्वीर इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. तस्वीर में कुछ लोग अपने सिर पर सामान रखकर सड़क पर पैदल जाते दिखाई दे रहे हैं, उनके ऊपर हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए जा रहे हैं.
दरअसल, 3 मई को भारतीय सेना ने कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स के सम्मान में उन पर पुष्प वर्षा की थी. इसी के बाद से ये तस्वीर अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर हो रही है. कुछ लोगों का मानना है कि तस्वीर फर्जी है, वहीं कुछ लोग इसे सच मानकर शेयर कर रहे हैं.

क्या है सच्चाई?
ये तस्वीर फर्जी है. इसे दो अलग-अलग तस्वीरों को जोड़कर बनाया गया है, जिससे ऐसा लगे कि हेलिकॉप्टर रोड पर चल रहे लोगों पर फूल बरसा रहा है.

फिल्म स्क्रीनराइटर मयूर पुरी ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है- "कहते हैं कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है. इसकी कीमत लाखों में हैं. मुझे नहीं पता कि इसे किसने खींचा है (किसी ने इसे एफबी पर पोस्ट किया है) लेकिन फोटोग्राफर 2020 के हर पहलू को एक फ्रेम में कैप्चर करने के लिए पुरस्कार का हकदार है. इतिहास इसी तरह की तस्वीरों से बना है"
मयूर पुरी के ट्वीट पर कई लोगों ने कमेंट किया है कि तस्वीर फोटोशॉप्ड है. लोगों के टोकने के बाद मयूर ने भी ये बात मान ली कि तस्वीर फर्जी है.
कुछ लोगों ने इस तस्वीर को तंज कसते हुए भी शेयर किया है. लोगों का कहना है कि देश में ये विडंबना है कि एक तरफ कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स पर फूल बरसाए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों को इतनी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

कहां की हैं तस्वीरें?
वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर इसकी सच्चाई सामने आ गई. जिस तस्वीर में लोग सड़क पर जाते हुए दिख रहे हैं उसे 27 मार्च, 2020 को दिल्ली से सटे फरीदाबाद में खींचा गया था. तस्वीर में दिख रहे लोग प्रवासी मजदूर हैं जो लॉकडाउन की वजह से पैदल ही अपने गांव जा रहे हैं. ये तस्वीर Getty Images पर मौजूद है.
न्यूज़ एजेंसी एपी के मुताबिक , हेलिकॉप्टर वाली तस्वीर 26 जनवरी, 2018 को गुवाहाटी में खींची गई थी."
यहां पर ये बात साफ होती है कि वायरल तस्वीर फोटोशॉप्ड है, इसे दो अलग-अलग तस्वीरों से बनाया गया है.