निकाह-ए-हलाला के नाम पर मौलवियों की करतूतों को बेनकाब करने वाले आजतक/इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन पर देश भर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कैमरे पर कैद मौलवियों के खिलाफ उन्हीं के इलाके के लोगों में आक्रोश दिखाई दिया. पैसे लेकर निकाह-ए-हलाला की बात छुपे कैमरे पर कहने वाले ये लोग अब मुंह छुपाते दिखाई दिए.
बुलंदशहर के तिलगांव में मेवातियन मस्जिद का खुद को इमाम बताने वाले जहीरूल्लाह को लेकर लोगों का कहना था कि उसने गांव के साथ कौम का नाम भी खराब किया. आज तक/इंडिया टुडे पर बुधवार को दिखाए गए स्टिंग ऑपरेशन में जहीरूल्लाह की हकीकत खुलने के बाद ही गांव वाले उसके घर पहुंच गए थे लेकिन वो घर से गायब था. गांव वालों के मुताबिक जहीरुल्लाह किसी मस्जिद का इमाम नहीं है. कई साल पहले वो मस्जिद का इमाम था, लेकिन उसे हटा दिया गया था.
गांव वालों ने बताया कि जहीरूल्लाह ताबीज आदि बेचा करता है और उसने लालच में आकर ही ये सब कहा. जहीरूल्लाह की पत्नी आफरोजा इस मामले में ज्यादा बोलने से परहेज करती दिखीं. आफरोजा की पत्नी ने माना कि जहीरुल्लाह ने जो भी कहा वो गलत कहा. आफरोजा ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनका शौहर निकाह-हलाला कराता रहा है.
जहीरुल्लाह गुरुवार को सामने आया. जहीरुल्लाह ने कहा, ‘मैं नहीं जानता था कि वो लोग मीडिया से थे. मैंने ये कभी नहीं कहा कि मैं हलाला कराउंगा. मैंने सिर्फ निकाह की बात कही थी. वो आरिफ था जो हलाला के लिए तैयार था. मैंने आरिफ को मिलवाया भी नहीं. अगर आप कह रहे हैं कि मैंने पेसे और निकाह हलाला की बात कही तो मैं नहीं जानता. मैंने उन्हें सिर्फ निकाह हलाला की प्रक्रिया के बारे में बताया था.’
स्टिंग ऑपरेशन में हापुड़ जिले के पिलखुवा के सिखेड़ा गांव मे मदरसा चलाने वाले मोहम्मद जाहिद की हकीकत भी खुल कर सामने आई थी. जाहिद ने पेशेवर की तरह निकाह-ए-हलाला के लिए अपनी सर्विस देने के लिए एक लाख से डेढ़ लाख के बीच चार्ज लेने की बात कही थी. जाहिद को ऐसा कहते हुए छुपे कैमरे से कैद किया गया था. अपनी कलई खुलने के बाद से ही जाहिद गायब है. उसने अपना फोन भी बंद कर रखा है. जाहिद की पत्नी हसीना के मुताबिक वो रात साढ़े 11 बजे घर आया था और सुबह 5 बजे ही घर से निकल गया. हालांकि हसीना ने ये भी कहा कि उसके पति के निकाह-ए-हलाला में शामिल होने की बात पहले कभी नहीं सुनी गई.
निकाह हलाला स्टिंग में फंसे दिल्ली के जामिया नगर के रहने वाले जुबेर कासमी ने गुरुवार को साफ इनकार किया कि निकाह हलाला के लिए कोई पैसे की मांग की थी. हालांकि वो छुपे कैमरे पर पैसो की मांग करता साफ कैद हुआ था.
नेताओं ने हलाला को बताया गलतआज तक/इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में दिखाई गई हकीकत पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने कहा कि कोई भी ऐसी बात जिससे लैंगिक अन्याय होता हो, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है वो संविधान सम्मत नहीं है. वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देश का संविधान जेंडर इक्विटी और सभी को समानता के अधिकार की बात कहता है. जो भी इसका उल्लंघन करता है वो स्वीकार्य नहीं है. नकवी ने कहा कि उन्होंने निकाह-ए-हलाला पर स्टिंग नहीं देखा इसलिए प्रतिक्रिया नहीं दे सकता. हालांकि नकवी ने तीन तलाक को अंसवैधानिक बताया.
मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि ये बिल्कुल गलत है और इस्लाम में हलाला जैसी कोई बात नहीं है. नजमा ने कहा कि इस्लाम शरियत नहीं है. इस्लाम कुरान और हदीस है. कुरान और हदीस में निकाह-ए-हलाला जैसी किसी बात का जिक्र नहीं है.
तीन तलाक पर पाबंदी से रुकेगा हलाला !
आजतक/इंडिया टुडे पर दिखाए गए स्टिंग को लेकर मुंबई में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) की संस्थापक नूरजहां नियाज ने कहा कि इस बारे में हम लंबे समय से सुनते आ रहे हैं. हमारे सेंटर पर कई महिलाएं आती हैं और इस बारे में बताती हैं. कुछ पुरुषों ने भी इस बारे में बताया. ऐसी बातों के खिलाफ समुदाय से ही आवाज उठनी चाहिए. इसके अलावा इसका कोई विधिक उपाय ढूंढते हुए इसे अवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए. जैसे हिंदू विवाह कोड लागू है ऐसे ही मुस्लिमों के लिए भी कानून को कोडिफाइड किया जाना चाहिए. इसमें ना सिर्फ हलाला बल्कि अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए. नूरजहां ने कहा कि ऐसी बातों के खिलाफ पुरुष और महिलाएं केस दर्ज कराने सामने नहीं आएंगे क्योंकि लोग उलेमा और काजियों पर आंख बंद कर भरोसा करते हैं और उनके हर शब्द को गंभीरता से लेते हैं. ये लोग जानते हैं कि ये कुरान का हिस्सा नहीं है. ना ही इसका कोई धार्मिक आधार है. अगर तीन तलाक जैसी प्रथा पर कोर्ट की ओर से रोक लगा दी जाती है तो ये (निकाह हलाला) अपने आप ही रुक जाएगा. नूरजहां ने कहा कि निकाह-ए-हलाला जैसी बातें उत्तरी राज्यों में ज्यादा सुनी जाती हैं. नूरजहां का संगठन इस्लाम के फ्रेमवर्क में रह कर महिलाओं के लिए समान नागरिकता अधिकार और लैंगिक न्याय की मांग उठाता है.