प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से भेंट की और बातचीत में चीन के साथ सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा रणनीति एवं आर्थिक भागीदारी मजबूत बनाने की भारत की इच्छा जाहिर की.
दोनों नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अलग से बैठक की. चीन के साथ व्यापार में भारी असंतुलन को लेकर भारत की चिंताओं के बीच दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के साथ आर्थिक एवं कारोबारी संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की.
वर्ष 2010 में 60 अरब डालर के द्विपक्षीय व्यापार में भारत का व्यापार घाटा (निर्यात पर आयात का आधिक्य) 20 अरब डालर तक पहुंच गया था. बैठक के प्रारंभ में सिंह ने हू से कहा कि भारत चाहता है कि चीन के साथ सहयोग का दायरा बढे.’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं अपनी बात को फिर से दोहरता हूं कि हम चीन के साथ रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी मजबूत बनाना चाहते हैं.’ दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे से मुलाकात की. भेंट के दौरान सिंह ने हू से उल्लेख किया कि वे दोनों जी-20 और बिक्र शिखर सम्मेलन समेत कई मौकों पर एक दूसरे से मिल चुके हैं.
हू ने कहा कि सिंह से मिलते हुए उन्हें खुशी हो रही है और वह उनके साथ आपसी हित के द्विपक्षीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार विमर्श करना चाहते हैं. भारत को चीन के साथ बढ़ते व्यापार असंतुलन के साथ साथ जम्मू-कश्मीर के लोगों को चीन द्वारा नत्थी वीजा दिये जाने तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीनी गतिविधियों को ले कर भी चिंताएं हैं.
हू के साथ बैठक से पूर्व सिंह ने कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देश हैं, ऐसे में भारत और चीन पर चहुंमुखी तथा सतत-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ की भारत यात्रा को याद करते हुए, सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार को व्यापक तथा संतुलित बनाने तथा आर्थिक सहयोग के लिये विभिन्न उपायों पर सहमत हुए थे.
उन्होंने शिन्हुआ को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘हमें व्यापार घाटा कम करने के लिये चीन में भारतीय निर्यात को बढ़ाने के लिये और प्रयास करने हैं.’ उन्होंने उम्मीद जतायी कि दोनों देश 2015 तक 100 अरब डालर के आपसी व्यापार लक्ष्य हासिल कर लेंगे.
इससे पहले, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने की जरूरत है. व्यापार असंतुलन दूर करने के लिये भारत ने आईटी और दवा क्षेत्र में चीनी बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है जिस पर विचार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि चीन ने भारत को आश्वासन दिया था कि वह भारत को दवा और आईटी जैसे क्षेत्रों में सरकारी अनुबंधों के जरिये बाजार पुंहच बढ़ाने में मदद देगा.