scorecardresearch
 

एजेंट ने दिया धोखा, जंग में झोंका, सरकारी बेरुखी... रूस में जान गंवाने वाले पंजाब के मनदीप की दर्दनाक दास्तां

बेहतर भविष्य की तलाश में 2023 में भारत से इटली जाने निकले मंदीप को कथित तौर पर ट्रैवल एजेंटों ने धोखा दिया और आर्मेनिया के रास्ते रूस पहुंचाकर 2024 में जबरन रूसी सेना में भर्ती करवा दिया. मंदीप के भाई का आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन कहीं से कोई ठोस मदद नहीं मिली.

Advertisement
X
मंदीप के भाई जगदीप ने सरकार पर आरोप लगाए (Photo- ITG)
मंदीप के भाई जगदीप ने सरकार पर आरोप लगाए (Photo- ITG)

पंजाब के जालंधर जिले के गोराया निवासी 30 वर्षीय मंदीप कुमार की दर्दनाक कहानी ने एक बार फिर विदेशों में फर्जी एजेंटों के जाल और सरकार की कथित उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेहतर भविष्य की तलाश में 2023 में भारत से इटली जाने निकले मंदीप को कथित तौर पर ट्रैवल एजेंटों ने धोखा दिया और आर्मेनिया के रास्ते रूस पहुंचाकर 2024 में जबरन रूसी सेना में भर्ती करवा दिया.

परिवार के मुताबिक, रूसी सेना में शामिल किए जाने के बाद मंदीप लगातार वीडियो भेजकर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाता रहा. इन वीडियो में वह साफ तौर पर कहता दिखता था कि उसे धोखे से युद्ध क्षेत्र में भेजा गया है और वह किसी भी हाल में वापस घर लौटना चाहता है. मार्च 2024 में परिवार से उसकी आखिरी बातचीत हुई, इसके बाद उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया. महीनों तक परिवार अनिश्चितता, डर और इंतजार के बीच जीता रहा.

'सरकार ने नहीं, मैंने ढूंढा भाई का शव'

मंदीप के भाई जगदीप का आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों तक हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन कहीं से कोई ठोस मदद नहीं मिली. जगदीप का कहना है कि फरवरी में उन्होंने AIIMS में डीएनए सैंपल भी दिया था, ताकि जरूरत पड़ने पर पहचान हो सके, लेकिन उनका दावा है कि यह सैंपल कभी रूस नहीं भेजा गया.

Advertisement

आखिरकार, निराश होकर जगदीप ने खुद रूस जाने का फैसला किया. उन्होंने अपनी तरफ से रूसी सेना के अधिकारियों से संपर्क किया, जानकारी जुटाई और वहीं डीएनए सैंपल देकर अपने भाई की पहचान सुनिश्चित की. दर्दनाक सच्चाई सामने आई कि मंदीप की मौत हो चुकी थी. यह सूचना किसी आधिकारिक या कूटनीतिक चैनल से नहीं, बल्कि जगदीप की व्यक्तिगत कोशिशों से सामने आई.

मौत में भी नहीं मिली गरिमा

जगदीप का आरोप है कि रूस जाने और पूरे अभियान का खर्च सरकार ने नहीं, बल्कि कांग्रेस सांसद राजा वड़िंग ने उठाया. इस बीच, एक रूसी कमांडर द्वारा भेजी गई तस्वीरों में मंदीप का शव बुरी तरह सड़ी-गली हालत में दिखा, जिसने मौत के बाद सम्मान और प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए.

करीब एक साल बाद आज मंदीप के पार्थिव अवशेष दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे. परिवार के लिए यह पल न तो राहत भरा है, न ही सुकून देने वाला. जगदीप भावुक होकर कहते हैं, “मेरे संपर्क में कई ऐसे परिवार हैं, लेकिन न दूतावास मदद करता है, न सरकार. कम से कम यह तो बताया जाए कि उनका अपना जिंदा है या मर चुका है.”

एक घर जो अब भी इंतज़ार में है

सबसे दर्दनाक सच यह है कि मंदीप के माता-पिता अब भी अपने बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. जगदीप कहते हैं कि उनमें अभी इतनी हिम्मत नहीं है कि वे अपने माता-पिता को यह बता सकें कि उनका बेटा अब कभी घर नहीं लौटेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement