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पंजाब के किसानों का धरना खत्म, मंत्री धालीवाल ने CM मान की तरफ से माफी मांगी, बोले- सहमति बन गई

पंजाब सरकार के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि हमने मैराथन बैठक की. यह खुशी की बात है कि हम आम सहमति पर पहुंच गए हैं. किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक 16 दिसंबर को चंडीगढ़ में होगी. किसानों के विरोध पर सीएम के टिप्पणी किए जाने पर माफी की मांग होने पर धालीवाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी थी.

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कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने जूस पिलाकर धरना खत्म करवाया. (फोटो- ट्विवर)
कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने जूस पिलाकर धरना खत्म करवाया. (फोटो- ट्विवर)

भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के प्रमुख जगजीत सिंह दल्लेवाल ने गुरुवार को 9वें दिन धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया है. गुरुवार को पंजाब सरकार के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल धरना स्थल पर पहुंचे और मैराथन बातचीत के बाद मांगों पर आम सहमति बनने की घोषणा की गई, जिसके बाद कृषि मंत्री धालीवाल ने दल्लेवाल को जूस पिलाकर धरना खत्म करवाया. बाद में दल्लेवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा- पंजाब के छह क्षेत्रों में किसानों का विरोध- प्रदर्शन चल रहा था, जिसे अब वापस ले लिया गया है. 

कृषि मंत्री ने कहा कि हमने मैराथन बैठक की. यह खुशी की बात है कि हम आम सहमति पर पहुंच गए हैं. किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक 16 दिसंबर को चंडीगढ़ में होगी. किसानों के विरोध पर सीएम के टिप्पणी किए जाने पर माफी की मांग होने पर धालीवाल ने कहा कि कुछ गलतफहमी थी क्योंकि AAP सरकार हमेशा किसान कल्याण के लिए खड़ी है. हालांकि, उन्होंने आगे कहा- अगर भगवंत मान के किसी भी शब्द से किसानों की भावनाएं आहत हुई हैं तो हम खेद व्यक्त करते हैं.

बताते चलें कि पंजाब के किसान पराली जलाने पर भारी जुर्माना का विरोध कर रहे हैं. इसके अलवा, खराब मौसम और कीटों के हमले से फसल क्षति के लिए कम मुआवजे का विरोध है. राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ भी किसान विरोध कर रहे हैं. गुरुवार को नौवें दिन में मंत्री किसानों के बीच पहुंचे और बातचीत की. 

किसान नेता डल्लेवाल ने हाल ही में सीएम की टिप्पणी के लिए माफी की भी मांग की थी. पराली जलाने के मुद्दे पर मंत्री धालीवाल ने कहा कि किसानों के खिलाफ दर्ज सभी केस वापस लिए जाएंगे. उन्होंने कहा- पराली का मुद्दा किसानों को दंडित करने के लिए नहीं है, लेकिन हमने कहा है कि हमें एक समाधान खोजना होगा. मंत्री ने कहा कि फसल क्षति के मुआवजे का भुगतान 31 दिसंबर तक किया जाएगा.

धालीवाल ने किसानों को आश्वासन दिया कि वे पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स एक्ट पर उनकी चिंताओं पर गौर करेंगे. किसानों को यह भी आश्वासन दिया गया कि मरने वाले या गांठदार त्वचा रोग से प्रभावित पशुओं के लिए मुआवजा दिया जाएगा. राज्य सरकार ने मांगों को मान लेने पर अधिसूचना जारी कर दी है. किसानों को यह भी कहा गया कि जो मुद्दे रह गए हैं उन्हें जारी कर दिया जाएगा. 

भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) अमृतसर, मनसा, पटियाला, फरीदकोट और बठिंडा में विरोध-प्रदर्शन कर रहा था. फरीदकोट जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दल्लेवाल को अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए मनाने के कई प्रयास किए थे. इससे पहले दिन में किसान नेताओं को एक बैठक के लिए बुलाया गया था, जिसमें फरीदकोट के उपायुक्त, जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और AAP के फरीदकोट विधायक गुरदित सिंह सेखों उपस्थित थे.

बैठक में किसान नेताओं ने सीएम भगवंत मान से माफी समेत अपनी मांगों को दोहराया. बाद में शाम को मंत्री धालीवाल ने किसानों के साथ मैराथन वार्ता की. बैठक के बाद किसान नेता धरना स्थल पर पहुंचे और दल्लेवाल को जानकारी दी. धालीवाल देर रात मौके पर पहुंचे और घोषणा की कि सहमति बन गई है. 

भारती किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के प्रमुख दल्लेवाल ने भी राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर वह किसी भी वादे से पीछे हटती है तो किसान अपना विरोध फिर से शुरू करने से नहीं हिचकेंगे. हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाएगा. 

सीएम भगवंत मान ने ये कहा था...

इससे पहले 18 नवंबर को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान भगवंत मान ने किसान संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें धरना देने और उस धरने से पैसे कमाने की आदत होती जा रही है. मान ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर बार-बार सड़कों को जाम करने के लिए किसान संगठनों की आलोचना की थी और कहा था कि आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि पिछले कुछ दिनों में धरना देकर सड़कों को अवरुद्ध करना एक 'प्रवृत्ति' बन गया है. सीएम मान के बयान से किसान और किसान संगठन आक्रोशित हो गए.

 

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