एक कवि ने भारत के आत्मबल और नए स्वरूप का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि भारत अब किसी के सामने नहीं झुकता. पहले जो भारत क्षमादान देता था, वह अब घर में घुसकर अपना बदला लेता है. कवि ने यह भी कहा कि "कल तक जुगनू तक भी हमको धमका देते थे. इसके बाद एक व्यंग्यकार ने बिहार में चुनाव आयोग से संबंधित एक हास्यपूर्ण स्थिति प्रस्तुत की.