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कुलपतियों की कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी बोले- स्टूडेंट्स को दे दें इंस्टिट्यूशनल स्ट्रेंथ तो व्यापक विकास

पीएम मोदी ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके जीवन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भी देश आज काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब से जुड़ी जगहों को पंच तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटोः पीटीआई)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पीएम ने की नई शिक्षा नीति की चर्चा
  • हर स्टूडेंट की अपनी सामर्थ्य- पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कुलपतियों की कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. पीएम मोदी ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके जीवन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भी देश आज काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब से जुड़ी जगहों को पंच तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है.

पीएम मोदी ने कहा कि बाबा साहेब ने समान अवसरों की बात की थी, समान अधिकारों की बात की थी. उन्होंने कहा कि आज देश जनधन खातों के जरिए हर व्यक्ति का आर्थिक समावेश हो रहा है. डीबीटी के जरिये गरीब का पैसा सीधा उसके खाते में पहुंच रहा है. पीएम ने डॉक्टर अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि वे कहते थे - मेरे तीन उपास्य देवता हैं. ज्ञान, स्वाभिमान और शील.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नॉलेज आती है, तब ही सेल्फ रिस्पेक्ट भी बढ़ती है. सेल्फ रिस्पेक्ट से व्यक्ति अपने अधिकार के लिए जागरूक होता है. उन्होंने कहा कि समान अधिकार से ही समाज में समरसता आती है और देश प्रगति करता है. पीएम ने कहा कि भारत दुनिया में मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहा है. डेमोक्रेसी हमारी सभ्यता, हमारे तौर-तरीकों का एक हिस्सा रहा है. आजादी के बाद का भारत अपनी उसी लोकतांत्रिक विरासत को मजबूत करके आगे बढ़े, बाबा साहेब ने इसका मजबूत आधार देश को दिया.

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पीएम ने नई शिक्षा नीति के साथ ही स्किल इंडिया की भी चर्चा की और छात्रों को लेकर कहा कि एक स्टूडेंट क्या कर सकता है? ये उसकी इनर स्ट्रेंथ है लेकिन अगर हम उनकी इनर स्ट्रेंथ के साथ उन्हें इंस्टिट्यूशनल स्ट्रेंथ दे दें तो इससे उनका विकास व्यापक हो जाता है. पीएम मोदी ने कहा कि इस कॉम्बिनेशन से हमारे युवा वो कर सकते हैं, जो वे करना चाहते हैं. हर स्टूडेंट की अपनी एक सामर्थ्य होती है, क्षमता होती है. इन्हीं क्षमताओं के आधार पर स्टूडेंट्स और टीचर्स के सामने तीन सवाल भी होते हैं. पहला- वो क्या कर सकते हैं? दूसरा- अगर उन्हें सिखाया जाए, तो वो क्या कर सकते हैं? और तीसरा- वो क्या करना चाहते हैं?

 

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