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अल्कोहल बनाम शराब... जानिए क्यों केंद्र और यूपी समेत राज्य सरकारों के बीच छिड़ी है कानूनी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में क्या रखी गईं दलीलें

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने बताया कि शराब हमेशा से राज्यों के विधायी क्षेत्र के तहत रही है और केंद्र सरकार का इंडस्ट्रियल एल्कोहल के मामले में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.

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Supreme Court
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 शराब और इंडस्ट्रियल एल्कोहल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है. इस मामले पर यूपी सरकार ने बुधवार को अदालत को बताया कि इंडस्ट्रियल एल्कोहल को विनियमित करने की विधायी शक्ति राज्यों के पास है. 

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने बताया कि शराब हमेशा से राज्यों के विधायी क्षेत्र के तहत रही है और केंद्र सरकार का इंडस्ट्रियल एल्कोहल के मामले में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.

उन्होंने कहा कि एक्साइज, शराब और स्पिरिट हमेशा से राज्यों के विधायी क्षेत्र रहे हैं और इसमें इंडस्ट्रियल एल्कोहल भी शामिल है. केंद्र ने इंडस्ट्रियल एक्ट, 1951 के तहत इंडस्ट्रियल एल्कोहल को रेगुलेट करने के लिए कोई आदेश नहीं दिया है. केंद्र सरकार इसमें दखल नहीं दे सकती क्योंकि इंडस्ट्रियल एल्कोहल को रेगुलेट करने की पूरी शक्ति राज्य के पास है.

ये मामला उद्योग (विकास और विनियमन) कानून 1951 की धारा 18जी से जुड़ा है. ये धारा केंद्र सरकार को ये सुनिश्चित करने का अधिकार देती है कि उद्योगों से जुड़े कुछ उत्पादों को सही तरीके से बेचा जाए और वो सही कीमत पर उपलब्ध हों.

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इस मामले में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार आमने-सामने हैं. अब सुप्रीम कोर्ट को ये फैसला करना है कि इंडस्ट्रियल शराब राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं?

9 जजों की बेंच में सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस ह्रषिकेष रॉय, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जवल भुयन, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एजी मसीह शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच तय करेगी कि इंडस्ट्रियल एल्कोहल राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं? बेंच को ये भी तय करना है कि क्या राज्य सरकार इंडस्ट्रियल एल्कोहल को कानूनी रूप से नियंत्रित कर सकती है या नहीं? इसके अलावा ये भी तय करना है कि क्या केंद्र ने 1951 के कानून की धारा 18जी के तहत इंडस्ट्रियल एल्कोहल को रेगुलेट करने के लिए कोई कानून बनाया है या नहीं?

दरअसल, इंडस्ट्रियल एल्कोहल और शराब दोनों ही रेक्टिफाइड स्पिरिट से बनाया जाता है. रेक्टिफाइड स्पिरिट को फिर 'डिनैचुरेशन' प्रक्रिया में भेजा जाता है, जिससे इंडस्ट्रियल शराब तैयार होती है. डिनैचुरेशन प्रक्रिया के कारण इस शराब का सेवन नहीं किया जा सकता है. 

मामला कई दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. 1997 में सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था कि इंडस्ट्रियल एल्कोहल को रेगुलेट करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. इसके बाद ये मामला 2010 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच के पास गया.

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