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अरुणाचल प्रदेश में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का केस सामने आया, संक्रमण रोकने के लिए उठाए गए ये कदम

अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले के लुआक्सिम गांव में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का मामला सामने आया है. संक्रमित क्षेत्र के 1 किमी दायरे को प्रतिबंधित घोषित किया गया है और 10 किमी तक निगरानी बढ़ा दी गई है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले के लुआक्सिम गांव में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) का एक पुष्ट मामला सामने आया है. यह जानकारी पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को दी. इस बीमारी की पुष्टि उस समय हुई जब एक सुअर के खून का सैंपल जांच के लिए असम के रानी स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन पिग में भेजा गया था. जांच में वह सैंपल ASF पॉजिटिव निकला.

पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर गन्नो तायेंग के मुताबिक, यह मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया और एहतियाती कदम उठाए गए हैं. जिला पशु चिकित्सा अधिकारी (DVO) डॉ. ओजुली मोयोंग ने लुआक्सिम गांव के एक किलोमीटर दायरे को 'संक्रमित क्षेत्र' घोषित कर दिया है. इसके अलावा गांव से 10 किलोमीटर दूर तक के क्षेत्र को ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित किया गया है.

संक्रमण रोकने के लिए उठाए गए ये कदम
इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं. जैसे सुअरों और उनके बच्चों की आवाजाही संक्रमित और निगरानी क्षेत्र में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है. इसके अलावा सुअरों की खरीद-बिक्री और वध पर भी रोक लगा दी गई है. स्थानीय सूअर मंडियां, चाहे वह अस्थायी हों या साप्ताहिक, उन्हें भी बंद कर दिया गया है.

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ASF इंसानों में नहीं फैलता
पशु चिकित्सा विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी तरह की संदिग्ध बीमारी की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की है. अधिकारियों ने यह भी बताया कि ASF इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन यह सुअरों के लिए बेहद जानलेवा होता है और इसका कोई इलाज नहीं है.

ASF एक वायरल बीमारी है, जो घरेलू और जंगली दोनों तरह के सुअरों को प्रभावित करती है. इसके कारण सुअरों में बुखार, त्वचा पर दाने, कमजोरी और मृत्यु तक हो सकती है. इसलिए इसे रोकने के लिए त्वरित और कड़े कदम उठाना जरूरी होता है.

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