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महाराष्ट्र में सिर्फ 'मराठी' अन‍िवार्य, कोई और भाषा नहीं... CM फडणवीस ने दिया साफ संदेश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विदेशी भाषाओं का स्वागत है लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध उचित नहीं. हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का पिछला निर्णय वापस लिया गया था. मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिला है और इसका पूरे देश में मान्यता दिलाने का लक्ष्य है. मुख्यमंत्री ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा का भी भरोसा दिया.

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फडणवीस का साफ संदेश: महाराष्ट्र में बच्चों को सीखनी है सिर्फ मराठी (Photo: ITG)
फडणवीस का साफ संदेश: महाराष्ट्र में बच्चों को सीखनी है सिर्फ मराठी (Photo: ITG)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को साफ कहा कि राज्य में सिर्फ मराठी भाषा अनिवार्य है और किसी और भाषा को थोपा नहीं जाएगा. ये बात उन्होंने सतारा में 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कही. साथ ही मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि विदेशी भाषाओं जैसे फ्रेंच और स्पेनिश के लिए तो स्वागत किया जाता है लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करना सही नहीं है.

फडणवीस ने याद दिलाया कि पिछले साल उनकी सरकार ने पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने का निर्णय वापस ले लिया था जब इस पर काफी विरोध हुआ था. इसके बाद एक समिति बनाई गई थी जो इस मुद्दे पर सुझाव दे रही थी.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर मैं साफ कहना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में सिर्फ मराठी अनिवार्य है, कोई और भाषा अनिवार्य नहीं है. छात्रों को ये स्वतंत्रता है कि वे अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीख सकते हैं. सवाल सिर्फ ये था कि तीसरी भाषा कब से शुरू की जाए.

उन्होंने ये भी बताया कि मवा सरकार के दौरान एक रिपोर्ट तैयार की गई थी जिसमें पहली कक्षा से हिंदी अनिवार्य करने की सिफारिश की गई थी. लेकिन व्यापक विरोध के बाद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता वाली समिति बनाई गई. समिति की रिपोर्ट अंतिम चरण में है और उसके बाद सरकार उपयुक्त निर्णय लेगी.

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फडणवीस ने यह भी कहा कि मराठी भाषा को 'अभिजात भाषा' का दर्जा मिलने की लंबी लड़ाई आखिरकार सफल हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे मंजूरी दी. लेकिन इसके बावजूद, मराठी बोलने वालों को संतुष्ट नहीं होना चाहिए.
'अब लक्ष्य है कि मराठी को पूरे देश में लोक मान्यता मिले.'

मुख्यमंत्री ने ये भी याद दिलाया कि आपातकाल के समय सतारा में हुए मराठी साहित्य सम्मेलन में प्रसिद्ध लेखिका दुर्गा भागवत ने कहा था कि साहित्य को नियमों में बांधना हास्यास्पद और खतरनाक दोनों है. फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमेशा सुरक्षित रहेगी और संविधान की सुरक्षा से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता.

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