बीते दिनों गुजरात के तापी में निर्माणाधीन ब्रिज टूटकर धराशाई हो गया था. इसके बाद सूरत में तापी नदी पर बने एक ब्रिज की सड़क धंस गई. इस सड़क को बनाने में 110 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इसी के साथ सूरत के कडोदरा इलाके में एक महीने पहले बने अंडरपास ब्रिज की ऊपरी सड़क पर भी गड्ढा हो गया, इसका वीडियो वायरल हो रहा है.
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने ट्वीट कर गुजरात सरकार पर तंज कसा और अंडरपास ब्रिज बनाने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. दरअसल, सूरत बारडोली रोड पर आने वाले कडोदरा इलाके में एक अंडरपास ब्रिज बनाया गया था.
तकरीबन 110 करोड़ की लागत से बने इस अंडरपास ब्रिज का एक महीने पहले ही गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने लोकार्पण किया था. इस अंडरपास ब्रिज को शुरू हुए अभी एक महीना ही हुआ था, कि ब्रिज के ऊपर सड़क पर एक गड्ढा हो गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

गुजरात कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
वायरल वीडियो को ट्वीट करते हुए गुजरात कांग्रेस के नेता अर्जुन मोढवाडिया ने गुजरात सरकार पर अंडरपास ब्रिज बनाने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. जिस जगह ब्रिज पर गड्ढा हुआ है, उसके नीचे से ब्रिज का पानी निकलने के लिए अंडरग्राउंड गटर लाइन बनाई गई है. वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी तंत्र हरकत में आया और बैरिकेडिंग कर गड्ढे को बंद कर दिया था. जिस जगह गड्ढा हुआ, उसे मैटेरियल से भर दिया गया और पॉलीथिन लगा दी गई, ताकि किसी को कुछ नजर न आए.

'जब ब्रिज बन रहा था, तब ध्यान देने की जरूरत थी'
कडोदरा में रहने वाले विजय भाई वाघेला ने कहा कि जब अंडरपास ब्रिज बनाने में सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है तो फिर इस तरह की चीजें क्यों सामने आती हैं. यह सीधे तौर पर अंडरपास बनाने में भ्रष्टाचार का संकेत है. उन्होंने कहा कि ब्रिज जब बन रहा था, तब अधिकारियों और सरकार को ध्यान देने की जरूरत थी कि इस ब्रिज को बनाने में किस तरह का मैटेरियल यूज हो रहा है.
स्थानीय नागरिक बोले- ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है
कडोदरा इलाके के रहने वाले प्रतीक भाई ने कहा कि 110 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अंडरपास ब्रिज में सीधे तौर पर भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार किया है. यह कोई पहली बार नहीं है. सूरत में भी इसी तरह से ब्रिज टूट गया था और तापी में भी एक ब्रिज टूट गया. अब यह अंडरपास ब्रिज के ऊपर भी गड्ढा हो गया है तो आखिर यह सब कैसे हो रहा है, यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है.