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फैक्ट चेक: पत्थरबाजी की ये फोटो कानपुर की है, हालिया जोधपुर हिंसा से नहीं है कोई कनेक्शन

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि जोधपुर हिंसा को लेकर वायरल हो रहा पत्थरबाजी का फोटो वहां का नहीं है बल्कि पत्थरबाजी का यह फोटो कानपुर का है.

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्थरबाजी का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्थरबाजी का फोटो

जोधपुर में ईद के मौके पर हुई हिंसा के बाद से ही पत्थरबाजी करते कुछ लोगों की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. इसे ‘#JodhpurViolence’ और ‘#धार्मिक_दंगे_बंद_करो’ जैसे हैशटैग्स के साथ शेयर किया जा रहा है. कुल मिलाकर, हैशटैग्स के जरिये ये कहने की कोशिश की जा रही है कि यह दृश्य हालिया जोधपुर हिंसा का है.

मिसाल के तौर पर, इसे पोस्ट करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “शांतिप्रिय लोग काम पर लगे हुए हैं”.

एक ट्विटर यूजर ने किया कमेंट

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां https://archive.is/wip/BY2cf देखा जा सकता है.

हमने पाया कि जोधपुर हिंसा के नाम पर वायरल हो रही पत्थरबाजी की तस्वीर न तो हाल-फिलहाल की है और न ही जोधपुर की है. ये साल 2019 की फोटो है जो उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खींची गई थी. ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ कानपुर के स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट हैदर नकवी ने ‘आजतक’ से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है.

कैसे पता लगाई सच्चाई?

वायरल फोटो को रिवर्स सर्च करने पर ये हमें magzter.com नाम की वेबसाइट पर मिली जहां अखबारों और मैग्जींस के नए-पुराने अंक बिकते हैं. इस वेबसाइट से हमें पता लगा कि ये फोटो ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ लखनऊ के 22 दिसंबर, 2019 के अंक में छपी थी. फोटो के साथ कैप्शन में लिखा है, ‘कानपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी करता एक बुजुर्ग व्यक्ति.’  

इस खबर में बताया गया है कि ये फोटो कानपुर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ी है.

हमने ये फोटो ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ कानपुर के स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट हैदर नकवी को भी भेजी. उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि ये तस्वीर कानपुर की ही है और साल 2019 के सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों से जुड़ी है.

जोधपुर हिंसा में हुई थी पत्थरबाजी

जोधपुर के जालोरी गेट इलाके में 2 मई की रात को झंडे और लाउडस्पीकर लगाने को लेकर दो गुटों के बीच हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि प्रशासन को कई जगहों पर कर्फ्यू लगाना पड़ा. ‘दैनिक भास्कर’ की एक खबर के अनुसार, इस दौरान उपद्रव करने वालों ने तेजाब से भरी बोतलें घरों में फेंकीं. तलवारें लहराईं. इतना ही नहीं, एक युवक की पीठ पर चाकू से हमला भी कर दिया. ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की 3 मई की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में कम से कम 53 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

हालांकि ये बात सच है कि जोधपुर हिंसा के दौरान पत्थरबाजी देखने को मिली थी. इसमें कई पुलिस वाले भी घायल हुए थे. इस हिंसा के दृश्य इस रिपोर्ट में देखे जा सकते हैं.

जाहिर है, तीन साल पुरानी तस्वीर को हालिया जोधपुर हिंसा से जोड़ते हुए भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

ये हालिया जोधपुर हिंसा की तस्वीर है. इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह शांतिप्रिय (मुस्लिम समुदाय के) लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं.

निष्कर्ष

ये फोटो उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की है जो 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान खींची गई थी.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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