अमिताभ बच्चन के लिए बॉलीवुड में एक कहावत है कि वो जिस फिल्म को हाथ लगाते हैं, वो सोना हो जाती है. ऐसा कई दशकों से देखा जा रहा है. लेकिन विज्ञापन जगत में अमिताभ कुछ खास जलवे नहीं दिखा पाए.
अमिताभ के विज्ञापन काफी रोमांचक होते हैं. लेकिन देखा जाए तो सिनेमा जगत की सबसे बड़ी हस्ती होने के नाते वो
किसी प्रोडक्ट की बिक्री अचम्भित रूप से नहीं बढ़ा पाए. उलटे, कुछ प्रोडक्ट्स तो ऐसे रहे जिनके लिए विज्ञापन करने के बाद मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, प्रोडक्ट पर भी
और खुद बिग बी पर भी.
मैगी विवाद:
अभी हाल ही में चल रहे मैगी विवाद ने अमिताभ बच्चन को टेंशन में डाल दिया. मैगी में अधिक मात्रा में सीसा पाए जाने की वजह से इसके उत्पादन पर रोक लगा दी
गई और तमाम दुकानों और शॉपिंग मॉल्स से इसे हटाने के आदेश जारी कर दिए गए. लेकिन इतना काफी नहीं था. कटघरे में बिग बी को भी खींच लिया गया. उन पर
आरोप लगा कि अगर कोई उत्पाद स्वास्थ्य के लिए इतना हानिकारक है तो वो कैसे उसका विज्ञापन या प्रचार कर सकते हैं!
फिलहाल तो बच्चन साहब इस आधार पर बचे हुए हैं कि काफी समय पहले ही अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाने की वजह से उन्होंने मैगी का विज्ञापन बंद कर दिया था. तो अब उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है. अब जब पहले बिग बी इसका विज्ञापन किया करते थे, उस समय मैगी की गुणवत्ता कैसी थी इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. लेकिन जो भी हो, न तो मैगी बिग बी के लिए लकी रही और न ही बिग बी मैगी के लिए.

मारुती सुजुकी वरसा की भी हुई थी टांय टांय फिस्स:
अक्टूबर 2001 में ब्रांड अंबेस्डर के तौर पर अमिताभ बच्चन ने मारुती सुजुकी की पहली मल्टीपर्पज कार वरसा लॉन्च की. कंपनी ने इसके उत्पादन में 300 से 400
करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था. टारगेट रखा की हर महीने कम से कम 1000 वरसा कारें तो बिकनी चाहिए. लेकिन इसके आधे का भी आधा नतीजा सामने नहीं आया.
आखिरकार थक हारकर कुछ सालों में कंपनी को वरसा कार ही बंद करनी पड़ी.

पेप्सी पर भी टूटा था मुसीबतों का पहाड़:
कोला सॉफ्ट ड्रिंक्स में पेप्सी दुनिया के लीडिंग ब्रांड्स में से एक है. भारत में इसका मार्केट बढ़ाने के लिए कंपनी ने ब्रांड अंबेसडर बनाया सदी के महानायक बच्चन साहब
को. प्रोडक्ट की सेल तो बेहिसाब बढ़ी. लेकिन कुछ समय बाद इस पर केस कर दिया गया कि इसमें कीटाणुनाशक का प्रयोग किया जाता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए
बिलकुल भी ठीक नहीं है. भारत में शीतल पेयों में रसायन होने के आरोपों की जांच करने वाली 5 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद में रखी
थी.
रिपोर्ट में एक गैर सरकारी पर्यावरणवादी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) के इन नतीजों को सही बताया गया था कि पेप्सी के पेयों में खतरनाक रसायन मिले होते हैं. उस वक्त बिग बी कंपनी के ब्रांड अंबेसडर थे. इस समय सभी रिपोर्टों में कहा गया था कि अगर इन कीटनाशकों का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो इनसे कैंसर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में गड़बड़ी, प्रजनन संबंधी बीमारियां और मस्तिष्क को भी नुकसान होने का खतरा रहता है. फिर अमिताभ बच्चन ने कहा था कि उन्होंने उसी दिन पेप्सी का प्रोमोशन बंद कर दिया जब एक लड़की ने उनसे पूछा कि आप उस ब्रांड का प्रचार क्यों करते हैं जिसे हमारे टीचर जहर कहते हैं.

चॉकलेट में से भी निकले थे कीड़े:
कैडबरी जैसी बड़ी कंपनी के लिए भी लकी साबित नहीं हो पाए थे बिग बी. साल 2003 में जब अमिताभ बच्चन डेरी मिल्क चॉकलेट के ब्रांड अंबेसडर थे. तब कैडबरी के
एक पैकेट में कीड़ा पाया गया था. प्रयोगशाला जांच के बाद इसकी पुष्टि भी हुई. चॉकलेट में कीड़ा पहले पुणे में, फिर मुंबई और उसके बाद नागपुर में पाया गया था.
कैडबरी इंडिया ने तो अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया था कि यह गड़बड़ी विक्रेता की ओर से थी, न कि कंपनी के कारखाने में, लेकिन उस समय भी बिग बी इससे जुड़े
हुए थे.
सदी के सबसे बड़े महानायक पर ऐसा आरोप नहीं लगाया जा सकता कि किसी प्रोडक्ट के साथ उनके जुड़ने से ऐसी गड़बड़ियां हुईं. लेकिन एक बात तो है, जिसके छूने से फिल्में सोना बन जाती हैं उसी के छूने से कुछ प्रोडक्ट कंकड़ तो बन गए! माफ कीजियेगा बच्चन साहब, हमारी भी यह मंशा नहीं कि ऐसा हर बार होता है. आखिर कल्याण ज्वेलर्स, गुजरात टूरिज्म, आईसीआईसीआई प्रूडेंशिअल, तनिष्क ज्वेलर्स, बोरोप्लस एंटीसेप्टिक क्रीम और नवरत्न तेल जैसे कई उत्पाद हैं जो अभी तक चैन की सांस ले रहे हैं.