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'पठान' की ताबड़तोड़ बुकिंग से दुखी बंगाली फिल्मों के मेकर्स, क्या है वजह?

शाहरुख खान की धमाकेदार फिल्म 'पठान' बुधवार को रिलीज होने वाली है. फिल्म की रिलीज बहुत बड़ी होने वाली है और इसे देशभर में बहुत बड़ा स्क्रीनकाउंट मिलने वाला है. मगर इस बड़ी फिल्म के आने से कई बंगाली फिल्मों को नुकसान होने वाला है. कई बंगाली फिल्ममेकर्स अब 'पठान' के बिजनेस मॉडल का विरोध कर रहे हैं.

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'पठान' फिल्म पोस्टर
'पठान' फिल्म पोस्टर

'पठान' की रिलीज को अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है. शाहरुख खान की कमबैक फिल्म देशभर में थिएटर्स को जनता से भरने की तरफ तेजी से बढ़ रही है. फिल्म की एडवांस बुकिंग के आंकड़े रिकॉर्ड बना रहे हैं. 'पठान' के 'बेशर्म रंग' गाने को लेकर शुरू हुए विवाद भी थमते हुए से नजर आने लगे हैं और सोशल मीडिया पर फिल्म का विरोध करने वाले भी शांत से पड़ गए हैं. 

'पठान' को लेकर बना माहौल इशारा कर रहा है कि पहले वीकेंड में ही फिल्म की कमाई जोरदार होने वाली है. पूरा हिंट मिल रहा है कि रिलीज के बाद फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर और प्रोड्यूसर का बैंक बैलेंस अच्छी खासी स्पीड से बढ़ने वाला है. लेकिन शाहरुख की इस बड़ी फिल्म से कोलकाता के कुछ फिल्ममेकर्स बिल्कुल भी खुश नहीं हैं.

'पठान' से बंगाली फिल्मों को नुकसान
शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर 'पठान' को बड़ी रिलीज मिले इसके लिए फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर यकीनन हर संभव कोशिश करेंगे. विदेशों में 'पठान' 2500 से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज होने जा रही है. भारत में भी इसका स्क्रीन काउंट ज्यादा से ज्यादा हो ये कोशिश की जाएगी. ऐसे में 'पठान' के डिस्ट्रीब्यूशन का मॉडल कोलकाता के कुछ फिल्ममेकर्स के लिए मुश्किल का कारण बन गया है. 

ईटाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते तीन बंगाली फिल्में 'काबेरी अंतर्ध्यान' 'दिलखुश' और 'डॉक्टर बख्शी' रिलीज हुई हैं. तीनों फिल्मों को क्रिटिक्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. लेकिन अब 'पठान' को जगह देने के लिए इनके शोज कम हो जाएंगे जिससे तीनों फिल्मों को बड़ा नुकसान पहुंचेगा. 

सिंगल स्क्रीन के लिए 'पठान' दिखाने का नियम 
रिपोर्ट में बताया गया है कि 'पठान' के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सिंगल स्क्रीन के लिए एक नियम रखा है. अगर सिंगल स्क्रीन थिएटर्स को 'पठान' दिखानी है तो उन्हें दिन के सारे शो शाहरुख की फिल्म को देने होंगे. 'काबेरी अंतर्ध्यान' बनाने वाले कौशिक गांगुली ने कहा कि सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के मालिकों पर जो दबाव हैं उसे वो समझते हैं इसलिए उनसे कोई शिकायत नहीं है. लेकिन इस तरह की बिजनेस पॉलिसी को बदले जाने की जरूरत है.

गांगुली ने बताया, 'हमें वेस्ट बंगाल में एक प्रॉपर फिल्म पॉलिसी की जरूरत है. मुझे पता है कि 'काबेरी अंतर्ध्यान' दूसरी बंगाली फिल्मों की तरह सफर करेगी. सिंगल स्क्रीन मालिकों को कह दिया गया है कि अगर उन्हें 'पठान' चलानी है, तो कोई और फिल्म नहीं चल सकती. बंगाली इंडस्ट्री सालों से इस मुद्दे पर चुप रही लेकिन अब हमें स्टैंड लेना होगा. 40-50 हॉल्स में अच्छा बिजनेस कर रही बंगाली फिल्म अगर अपने ही राज्य में इस तरह का बुरा ट्रीटमेंट झेलेगी, तो हमें मानना पड़ेगा कि कुछ तो समस्या है.' उन्होंने आगे कहा कि बंगाली फिल्मों को प्राइम टाइम पर कम से कम 50 प्रतिशत शोज मिलने चाहिए और जरूरत पड़ने पर सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए.  

'पठान' के डिस्ट्रीब्यूशन हाउस का कहना है कि हिंदी फिल्मों के लिए ये बिजनेस मॉडल नया नहीं है और सालों से चल रहा है. जबकि बंगाली फिल्ममेकर्स का ये भी कहना है कि ये एक बिजनेस डिसीजन है और ऐसा नहीं है कि हिंदी फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूटर, बंगाली सिनेमा को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा करते हैं.

इस बीच नविना, सार थिएटर और अशोका जैसे कई ऐसे सिंगल स्क्रीन भी हैं जिन्होंने 'पठान' की जगह बंगाली फिल्में चलाने का फैसला किया है. अशोका के मालिक प्रबिर रॉय ने कहा, 'हां, मैं शाहरुख खान की फिल्म चलाना चाहता था. लेकिन वो (पठान के डिस्ट्रीब्यूटर) दूसरी बंगाली फिल्मों के साथ नेगोशिएट करने को तैयार ही नहीं हैं. इसलिए मैंने उन्हें मना कर दिया.'  

 

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