
कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो हमेशा के लिए जीवंत होती हैं. यानी आप उन फिल्मों को कभी भी कहीं से देख सकते हैं और वह फिल्म हमेशा उस पल और वक्त के मुताबिक आपको दिखाई देगी. साल 1983 में 12 अगस्त के दिन भी एक ऐसी ही फिल्म रिलीज़ हुई थी, जिसका नाम था ‘जाने भी दो यारों’. (Jaane Bhi Do Yaaro)
कुंदन शाह द्वारा बनाई गई इस ऐतिहासिक फिल्म की मिसालें फिल्म इंस्टीट्यूट में दी जाती हैं. तब कैसे एक डार्क पॉलिटिकल सटायर तैयार किया गया, जो हर वक्त देश की स्थिति और राजनीतिक माहौल को बताने के लिए बिल्कुल बेहतर नज़र आता है.
नई पीढ़ी हो या फिर पुरानी पीढ़ी, हर कोई इस फिल्म का दीवाना दिखाई पड़ता है. आज जब इस फिल्म को 38 साल पूरे हो रहे हैं, तब इस मौके पर आप इस फिल्म के कुछ शानदार डायलॉग को फिर से याद कीजिए और उन पलों को जी लीजिए...
1. द्रौपदी तेरे अकेले की नहीं है, हम सब शेयरहोल्डर हैं...
2. नालायक, अधर्मी, दुरुचारी, मामाचारी, भ्रष्टाचारी, बोल सॉरी...
3. देश की उन्नति की पहचान अगर किसी चीज़ से होती है, तो वो है गटर..
4. शराबी तो शराबी की मदद करेगा...
5. मैंने चीरहरण का आइडिया ड्रॉप कर दिया है...
6. थोड़ा खाओ, थोड़ा फेंको, बहुत मज़ा आएगा...
7. अबे शांत! गदाधारी भीम, शांत...
8. ये क्या हो रहा है दुर्योधन?....

राजनीति और सिस्टम पर सबसे सटीक सटायर...
डायरेक्टर कुंदन शाह की इस फिल्म में समाज के हर पहलू को छूने की कोशिश की गई थी. राजनीति, बिजनेस, मिडिल क्लास का संघर्ष, भ्रष्टाचार से जूझते लोग और हर बात पर गहरा तंज कसा गया था. यही कारण है कि आज भी इस फिल्म के सीन और डायलॉग ज़िंदा हैं और सोशल मीडिया पर आपको दिख जाते होंगे.
कुंदन शाह की बतौर डायरेक्टर ये पहली फिल्म थी, जिसके लिए उन्हें अवॉर्ड भी मिला था. इस फिल्म के बाद उन्होंने नुक्कड़, वागले की दुनिया, कभी हां-कभी ना, हम तो मोहब्बत करेगा, परसाई कहते हैं जैसी कई फिल्में और टीवी सीरीज़ बनाईं.
जाने भी दो यारों की कास्ट...
नसीरुद्दीन शाह, रवि बसवानी, ओम पुरी, पंकज कपूर, सतीश शाह, भक्ति भार्वे, राजेश पुरी, सतीश कौशिक, नीना गुप्ता, अशोक बंटिया, अनुपम खेर, विधु विनोद चोपड़ा.
डायरेक्टर: कुंदन शाह, लेखक: सतीश कौशिक, रंजीत कपूर