scorecardresearch
 

Jeetendra Birthday: जितेंद्र-राकेश रोशन की 40 साल पुरानी दोस्ती के पीछे पत्नियों का हाथ, जानें वजह

Jeetendra Birthday: बॉलीवुड इंडस्ट्री में जितेंद्र और राकेश रोशन की लगभग 40 साल की दोस्ती है. आए दिन जितेंद्र अक्सर राकेश रोशन, प्रेम चोपड़ा संग पार्टी की तस्वीरें शेयर करते रहते हैं. अपने खास दोस्त के जन्मदिन के मौके पर राकेश हमसे इस अटूट दोस्ती का सीक्रेट शेयर कर रहे हैं.

Advertisement
X
ऋृषि कपूर-जितेंद्र-राकेश रौशन
ऋृषि कपूर-जितेंद्र-राकेश रौशन

बॉलीवुड एक्टर जितेंद्र के करीबी दोस्तों में राकेश रोशन का नाम शुमार है. राकेश और जितेंद्र अक्सर साथ में पार्टी करते पाए जाते हैं. उन्होंने बताया लगभग चालीस साल की इस गहरी दोस्ती के पीछे उनकी पत्नियों का बड़ा हाथ है. 

फूड और ड्रिंक हैबिट में गजब का है कंट्रोल 

आजतक डॉट इन से खास बातचीत के दौरान राकेश बताते हैं, 'मेरी और जितेंद्र की दोस्ती पिछले 40 सालों से चल रही है. न मैं उसके बिजनेस में दखल देता हूं और न ही उसे मेरे काम से कोई मतलब होता है. जब दोस्ती में बिजनेस का इनवॉल्वमेंट नहीं हो, तो वो ज्यादा लंबी चलती है. शायद इसलिए हमारी दोस्ती टिकी हुई है और टिकी रहेगी. जितेंद्र के साथ एक बड़ी बात यह है कि वो ऑनस्क्रीन जितने सीधे हैं, उतने ही सीधे ऑफस्क्रीन भी हैं. उस इंसान में जो ठहराव है, वो बहुत कम लोगों में है. ड्रिंक और फूड हैबिट को लेकर जो उनका सेल्फ कंट्रोल है, मैं उसका मुरीद हूं. मैंने बहुत कुछ सीखा है, उससे.'

पत्नियों की वजह से बने गहरे दोस्त 

Advertisement

जितेंद्र संग अपनी पहली मीटिंग पर राकेश रोशन कहते हैं, 'हम एक इंडस्ट्री में तो थे, लेकिन हमारी गहरी बॉन्डिंग की वजह हमारा काम नहीं बल्कि हमारी बीवियां थीं. दरअसल हुआ ये कि एक पार्टी के दौरान जितेंद्र की वाइफ शोभा और मेरी पत्नी पिंकी इतनी बातें करने लग गए कि उनकी फॉर्मल मीटिंग दोस्ती में तब्दील हो गई. आगे चलकर उनकी गैंग में नीतू कपूर भी शामिल हो गईं. ऐसे में इन तीनों पत्नियों की वजह से भी हम आपस में अक्सर मिलने लगे और वो सिलसिला चालीस साल से बरकरार है. कभी मेरे घर, तो कभी जीतू तो कभी ऋषि कपूर के घर पार्टी होती और हम सभी एक साथ इकट्ठा होते थे.'

दोस्ती का फायदा नहीं उठाया 
राकेश आगे कहते हैं, 'मुझे इस बात को कबूल करने में कोई हिचक नहीं कि जितेंद्र जिस लेवल के एक्टर थे, मैं उस लेवल तक नहीं पहुंच पाया. इनफैक्ट जब वो बहुत अच्छा कर रहे थे, तो मुझे काम तक मिलने की दिक्कत हो रही थी. हालांकि मैंने कभी उसकी दोस्ती का फायदा उठाते हुए नहीं कहा कि मुझे अपनी फिल्मों में काम दिला दो. वहीं जब मेरा डायरेक्शन का काम निकल पड़ा, तो उसने भी कभी कॉल कर मुझसे नहीं कहा कि दोस्ती की खातिर मुझे अपनी फिल्मों में कास्ट कर लो.

Advertisement

''हमारी दोस्ती की यही खूबसूरती थी. हां, जब मैं 'खुदगर्ज' बना रहा था, तो मुझे लगा कि इसमें जितेंद्र परफेक्ट रहेगा और उन्हें कास्ट कर लिया. मैंने पैसे भी उसे उतने ही दिए, जितना उस वक्त वो चार्ज करता था. प्रोफेशनल लेवल पर कभी हमारी बहस नहीं हुई क्योंकि हमने अपने पर्सनल टर्म को बीच में आने ही नहीं दिया. वहीं जब साथ पार्टीज करते थे, तो कभी काम के सिलसिले में कोई बातचीत नहीं की.''

 

Advertisement
Advertisement