मिर्जापुर 2 का ट्रेलर 6 अक्टूबर को रिलीज हुआ और इसके आते ही यूट्यूब पर धूम मच गई. इस ट्रेलर को अभी तक 20 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. यह यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है. लोग बहुत उत्सुक हैं कालीन भैया और गुड्डू पंडित के बीच की जंग का नजारा देखने की लिए. ऐसे में आजतक ने मिर्जापुर के कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी संग वेब सीरीज को लेकर खास बातचीत की.
मिर्जापुर 2 के बारे में बताते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा, "इस सीजन में कहानी थोड़ी और गहरी और बड़ी हो जाएगी. नए किरदार आएंगे, नए ट्विस्ट आएंगे, नए षड्यंत्र होंगे, नई चुनौतियां होंगी. तो बहुत कुछ नया है सीजन 2 में और नया मनोरंजन भी है. कालीन भैया को लोगों ने अगर मिर्जापुर सीजन 1 में पसंद किया था तो इस सीजन में वो और पसंद आएगा."
उन्होंने ये भी कहा, "मुझे लगता है कहानी, किरदार और परफॉरमेंस की वजह से ये सीरीज इतनी फेमस है. हर करैक्टर बहुत एंगेजिंग है, लोगों को बांधकर रखा, मनोरंजन दिया. ओटीटी की ऑडियंस और खासकर मिर्जापुर की ऑडियंस जो यूथ हैं उनको मनोरंजन बहुत चाहिए और मनोरंजन के साथ-साथ हम सटल तरीके से अपनी बात भी कह रहे हैं सीरीज में जो दर्शकों को बहुत पसंद आई है."
कहां हुई है मिर्जापुर 2 की शूटिंग
वेब सीरीज की शूटिंग और अपनी टीम के बारे में बताते हुए पंकज त्रिपाठी ने बताया, "बनारस में मोती झील करके एक जगह है वही शहर के अंदर, वहीं पर है त्रिपाठी निवास. हमने बनारस में, चुनार में, मिर्जापुर में, उसी इलाके में शूट किया है. कुछ पार्ट लखनऊ में, भदोही में जहां मेरी कार्पेट फैक्ट्री है, गोपीगंज और अलग-अलग हिस्सों में शूट किया है. हमारी टीम में सब बहुत ही सेंसिबल, अच्छे और कमाल के लोग हैं. मैं ही थोड़ा चुलबुला और हंसी मजाक करता रहता हूं, कहानियां सुनाता रहता हूं. हमारी जो पूरी कास्ट है वो ऐसे लोग हैं जो फिल्म स्कूल से, एफटीआई से, एनएसडी से और थिएटर से हैं. हमारी कास्ट पूरे भारत का प्रेजेंटेशन हैं. मैं बिहार से हूं, रसिका जमशेदपुर की हैं, अली लखनऊ के, दिव्येंदु दिल्ली से, कुलभूषण जी मुंबई के, रजिया झारखंड के हजारीबाग से, तो पूरे भारत का कास्ट है और मजा आता है साथ में काम करने में."
बनारस के बारे में बताते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा, "वो नीरस भूमि नहीं है, वो रसदार भूमि है. वहां के किरदारों में रस होते हैं. इसीलिए पुनीत और विनीत जो राइटर हैं मिर्जापुर के वो बीएचयू (बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी) के पढ़े हुए हैं. बनारस वैसे भी रस का शहर है. वहां पर लोगों की सामान्य बातचीत भी बहुत एंटरटेनिंग लगेगी. मलइयो चाट और बनारसी पान मुझे बहुत पसंद है. मुझे बनारस बहुत पसंद हैं. मैं जब भी जाता हूं तो मैं घाट पर ही रहता हूं. मैं आठ फिल्में कर चुका हूं वहां पर, मेरे बहुत परिचित लोग हैं वहां."
स्क्रीन पर गाली देने को लेकर बोले पंकज
स्क्रीन में कालीन भैया को देखते ही दर्शक खुश हो जाते हैं. उनके डायलॉग्स और पंच लाइन्स बहुत तगड़े होते हैं. अपनी पंच लाइन्स के बारे में बताते हुए पंकज त्रिपाठी ने कहा, "मुझे अपनी पंच लाइन्स याद ही नहीं. मैं शूटिंग करता हूं और भूल जाता हूं क्योंकि कई बार मैं अपने तरीके से करता हूं. मैं कोई भी संवाद को चाहता हूं कि बहुत रिलेटेबल और बातचीत की तरह लगे, वो संवाद की तरह ना लगे. ऐसा लगे जैसे आम बोलचाल भाषा में इसने बहुत बड़ी बात कह दी या हंसाने वाली बात कह दी. फिलहाल तो मुझे याद नहीं है लेकिन बहुत मीम्स बनते हैं. 'हम करते हैं प्रबंध' जो बहुत पॉपुलर हो गया. बड़े टैलेंटेड लोग हैं भारत के बहुत अच्छे अच्छे मीम्स बनाते हैं."
वेब सीरीज में बोल्ड सीन्स के साथ-साथ बोल्ड डायलॉग्स भी होते हैं. जैसे मिर्जापुर सीजन 1 में कालीन भैया और बाकी किरदारों ने डॉयलग्स में गालियों का प्रयोग किया था वैसा ही सीजन 2 में भी सुनने को मिलेगा. इसपर पंकज त्रिपाठी ने कहा, "गालियों का समाज में इस्तेमाल करना तो बिलकुल भी सही नहीं है प्रत्यक्ष रूप से, लेकिन हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि समाज में, जिन्दगी में, चौक-चौराहे पर लोग आम बातचीत में गालियों का प्रयोग नहीं करते. इसलिए ओटीटी पर एक डिस्क्लेमर भी चलता है कि ये कंटेंट जो है वो 18 प्लस के लिये है, एडल्ट के लिए है और एडल्ट इतने समझदार हैं कि उसको क्या चीज मनोरंजन के तौर पर लेना है और किस चीज से इंस्पायर होना है.''
उन्होंने आगे कहा, ''मैं भी सार्वजनिक और निजी जीवन में गालियों का प्रयोग बिलकुल नहीं करता हूं. मैं कहानियों में भी तभी करता हूं जब बहुत जरूरी हो किरदारों की लिए, कि इस बात के बगैर कहानी पूरी नहीं हो रही है. तो मैं भी खुद का एक सेल्फ सेंसर रखता हूं. मैं जिम्मेदारी पूर्वक काम करता हूं सिर्फ सनसनी के लिए नहीं करना है. कहानी की जरूरत कितनी है, इस सिचुएशन की जरुरत कितनी है. कई बार मनोभाव होते हैं आप अपनी बात चार सेंटेंस में नहीं कहोगे लेकिन वो एक गाली के थ्रू कम्युनिकेट हो जाएगी. लेकिन जिम्मेदारी के तहत उसका प्रयोग होना चाहिए."
मेरी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बनेगी
पंकज त्रिपाठी ने 'सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर और क्रिमिनल जस्टिस जैसी वेब सीरीज के साथ-साथ कई फिल्मों में भी काम किया है. इसी साल 2020 में पंकज त्रिपाठी बॉलीवुड फिल्म 'गुंजन सक्सेना-द कारगिल गर्ल' में जाह्नवी कपूर के पिता का रोल निभाते हुए नजर आए थे. लेकिन सभी किरदारों में से उनका कालीन त्रिपाठी का किरदार बहुत ही फेमस हुआ. इसे लेकर उन्होंने कहा, "मैं जहां जाता हूं वहां मुझे लोग कालीन भैया से ही याद करते हैं. ये किरदार बहुत ही पॉपुलर हो गया है और मेरे गांव के कुछ लोग हैं जो सिनेमा के किस्से सुनना चाहते हैं, जानना चाहते हैं कि ये सीन कैसे होता है, गोली सच में चलती है क्या, सीन में खून कैसे निकलता है, ये सब पूछते हैं. मैं बताता हूं कि ये जादू है. हम लोगों ने ये महारथ सीख लिया है तो जादू को जादू ही रहने दो. अगर सच्चाई पता चलेगा तो तुम्हे मजा नहीं आएगा. बाकी मेरी जर्नी की कहानी बहुत सारे लोगों और छोटे-छोटे बच्चों को हौसला देगी जो भारत के छोटे-छोटे गांव, खेड़े और इलाके में है कि वो कुछ भी कर सकते हैं. मुश्किल है पर असंभव नहीं है कुछ भी."
पंकज त्रिपाठी नहीं लेते थे वीकली ऑफ
साथ ही पंकज त्रिपाठी ने ये भी बताया कि वो अपने काम में इतने बिजी रहते थे कि उन्हें वीकली ऑफ तक नहीं मिलता था. इस लॉकडाउन में उन्होंने अपने परिवार के साथ बहुत ही अच्छा समय बिताया. उन्होंने कहा, "मुझे छुट्टी की जरुरत थी वो मुझे मिल गई. इस लॉकडाउन में मैंने सेल्फ अस्सेस्मेंट किया कि जिन्दगी में सबसे ज्यादा जरूरी जिंदगी है. मैंने कभी भी वीकली ऑफ नहीं लिया, पिछले दो साल से मुझे एक भी वीकली ऑफ नहीं मिला है. अब तय किया है कि जब भी काम शुरू करूंगा तब हफ्ते में एक दिन ऑफ जरूर लूंगा काम से और थोड़ा परिवार के साथ ज्यादा समय बिताऊंगा.