उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पॉश इलाके की विधानसभा सीट है राजपुर रोड विधानसभा सीट. देहरादून की राजपुर रोड विधानसभा सीट उत्तराखंड की 70 सीटों में से एक है. राजधानी देहरादून की ये पॉश सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है. देहरादून की ये सीट अधिक पुरानी नहीं है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
देहरादून की राजपुर रोड विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये सीट साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. उत्तर में बन्नू स्कूल से दक्षिण में दिलाराम बाजार तक फैली इस सीट के तहत ही घंटाघर, करनपुर, राजपुर रोड, दिलाराम बाजार, सहारनपुर रोड, प्रिंस चौक आदि क्षेत्र आते हैं.
राजपुर रोड़ विधानसभा क्षेत्र में कई वीआईपी इलाके हैं तो साथ ही करीब डेढ़ दर्जन मलिन बस्तियां भी. इस विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से करीब 55 फीसदी इन्हीं मलिन बस्तियों में रहते हैं. इस सीट के लिए अब तक दो दफे यानी 2012 और 2017 में चुनाव हुए हैं और दोनों ही दफे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के उम्मीदवारों में ही टक्कर नजर आई है.
राजपुर रोड विधानसभा सीट का नाम 2008 के परिसीमन से पहले राजपुर था. 2002 के विधानसभा चुनाव में राजपुर सीट से कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट और 2007 में बीजेपी के गणेश जोशी जीते थे. परिसीमन के बाद राजपुर रोड सुरक्षित सीट से साल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर राज कुमार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए.
2017 का जनादेश
राजपुर रोड सुरक्षित सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को जीत मिली. बीजेपी ने 2017 के चुनाव में खजान दास को उम्मीदवार बनाया था. बीजेपी के खजान दास ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के राज कुमार को हरा दिया था. खजान दास 2017 में इस सीट से बीजेपी के टिकट पर पहली दफे विधानसभा के लिए चुने गए.
सामाजिक ताना-बाना
राजपुर रोड विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाताओं की बहुलता है. इस विधानसभा क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी राजपुर रोड विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
राजपुर रोड विधानसभा सीट से विधायक बीजेपी के खजान दास का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का चहुंमुखी विकास हुआ है. खजान दास का दावा है कि उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कार्य बड़े पैमाने पर कराए गए हैं. दूसरी तरफ, विरोधी दल कांग्रेस के नेता विधायक के दावे को खारिज कर रहे हैं.