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यूपी: उन्नाव में अखिलेश यादव की रथ यात्रा, निषाद समुदाय के नेता की जयंती में शामिल होकर दिया संदेश

विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश का यह दांव निषाद वोट बैंक की सियासत से जोड़ कर देखा जा रहा है. यूपी में निषाद, मल्लाह और कश्यप वोट बैंक करीब 4 फीसदी हैं.

उन्नाव में अखिलेश की रथ यात्रा (फोटो- ट्विटर) उन्नाव में अखिलेश की रथ यात्रा (फोटो- ट्विटर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा की भी निषाद वोट बैंक पर नजर
  • उन्नाव में अखिलेश यादव की रथ यात्रा

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल पूरी तैयारी में जुट गए हैं. केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में ओबीसी चेहरों को जगह देने के बीजेपी के दांव के बाद अब यूपी में समाजवादी पार्टी की रणनीति भी ओबीसी वोट बैंक को एकजुट करने की है. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को उन्नाव दौरा किया.

उन्नाव में अखिलेश यादव निषाद समुदाय के बड़े नेता रहे मनोहर लाल की 85वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान अखिलेश यादव ने मनोहर लाल की एक मूर्ति का अनावरण किया और उन्नाव तक रथ यात्रा निकालकर बीजेपी को एक संदेश देने का प्रयास किया. 

विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश का यह दांव निषाद वोट बैंक की सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है. यूपी में निषाद, मल्लाह और कश्यप वोट बैंक करीब 4 फीसदी हैं. 

मनोहर लाल की विरासत पर सियासत 

मनोहर लाल साल 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में मत्स्य पालन मंत्री रहे थे. मनोहर लाल तब चर्चित हुए थे जब 1994 में फूलन देवी की रिहाई को लेकर वे अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे और निषाद के अधिकारों की मांग करने लगे. मनोहर लाल ने ही सबसे पहले रेती में खेती का मुद्दा उठाया था. मनोहर लाल को निषाद-बिंद-मल्लाह-कश्यप और लोध जातियों को एकजुट करने के लिए भी जाना जाता है. 

यूपी की सियासत में 2018 से निषाद वोट बैंक को निर्णायक समझा जाने लगा. साल 2018 में गोरखपुर उपचुनाव में निषाद पार्टी और सपा के गठबंधन के बाद बीजेपी चुनाव हार गई और सपा से प्रवीण निषाद गोरखपुर से सांसद बन गए. गोरखपुर योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट थी. इसीलिए 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने निषाद पार्टी से गठबंधन कर लिया.

मुखर हुआ है निषाद वोट बैंक 

पूर्वी यूपी और मध्य यूपी के कई जिलों में निषाद वोट बैंक का अच्छा खासा प्रभाव है. पूर्वी यूपी में तो कई सीटों पर हार-जीत निषाद मतदाता ही तय करते हैं. इसीलिए विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा में निषाद वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए होड़ लगी हुई है. 

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले लगातार अलग-अलग जिलों में जा जाकर पार्टी के जिम्मेदार कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी. और तभी समाजवादी पार्टी ने हर जिले में जाकर प्रशिक्षण शिविर चलाए थे. और लोगों की मदद की थी. 

अखिलेश ने कहा कि मनोहर लाल और उनका परिवार समाजवादी पार्टी से बहुत पहले से जुड़ा है. हमारी कोशिश है कि हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलें. संविधान ने जो हक और अधिकार दिए हैं फिर चाहे वो दलितों का हो या निषाद जाति का, सबको मिलना चाहिए.  

 

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