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लुधियाना लोकसभा: BJP रणनीति में जुटी, कांग्रेस के सामने सीट बचाने की चुनौती

पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद पंजाब में बीजेपी-अकाली को 2014 में बड़ी कामयाबी नहीं मिली थी. लुधियाना लोकसभा सीट पर बीजेपी-अकाली उम्मीदवार पिछड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे. कांग्रेस उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू ने यहां से आम आदमी पार्टी (AAP) प्रत्याशी हरविंदर सिंह फूल्का को 39,709 वोटों से हराया था.

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लुधियाना सीट पर बीजेपी की नजर (Photo: File)
लुधियाना सीट पर बीजेपी की नजर (Photo: File)

लुधियाना लोकसभा सीट को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है. इस सीट पर 2014 में AAP उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा था. जबकि अकाली प्रत्याशी खिसककर तीसरे पायदान पर पहुंच गया था. लेकिन अब लुधियाना सीट पर बीजेपी की नजर है. बीजेपी की सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस इस सीट को बचाने में जुट गई है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लगातार 2 बार लुधियाना से अकाली दल के उम्मीदवार को मिली हार के बाद 2019 में यह सीट बीजेपी के खाते में भी जा सकती है और इसके बदले अकाली दल को अमृतसर सीट मिल सकती है.

चर्चा है कि कांग्रेस यहां के मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मैदान में उतार सकती है. अगर समझौते के तहत यह सीट बीजेपी के खाते में गई तो पार्टी यहां से पूर्व AAP नेता एच एस फूल्का पर भी दांव लगा सकती है. हालांकि अभी तक फूल्का बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं. लेकिन लगातार इनकी बीजेपी से नजदीकियां बढ़ने की खबरें सामने आती रही हैं.

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2014 का जनादेश

पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद पंजाब में बीजेपी-अकाली को 2014 में बड़ी कामयाबी नहीं मिली थी. लुधियाना लोकसभा सीट पर बीजेपी-अकाली उम्मीदवार पिछड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे. कांग्रेस उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू ने यहां से आम आदमी पार्टी (AAP) प्रत्याशी हरविंदर सिंह फूल्का को 39,709 वोटों से हराया था. रवनीत सिंह बिट्टू को 27.27 फीसद वोट शेयर के साथ 3,00,459 वोट मिला था. जबकि फूल्का को 25.48 फीसदी वोट शेयर के साथ 2,60,750 वोट मिला था. वहीं अकाली-बीजेपी उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली को 23.28 फीसद मत शेयर के साथ कुल 2,56,590 वोट मिला था. जबकि निर्दलीय उम्मीदवार सिमरजीत सिंह वैंस को 2,10,457 वोट पड़े थे.

सामाजिक ताना-बाना

इससे पहले लोकसभा चुनाव 2009 में लुधियाना से कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने अकाली उम्मीदवार गुरचरण सिंह गालिब को 1 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. लुधियाना सीट पर 1952 से 2014 तक 16 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. जिसमें 9 बार कांग्रेस को कामयाबी मिली है, जबकि 6 बार अकाली उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी. पिछले 20 वर्षों में इस सीट पर केवल 2004 में अकाली उम्मीदवार की जीत हुई थी.

सूत्रों के मुताबिक जालंधर और लुधियाना सीट पर बीजेपी की नजर है, क्योंकि पिछले कई लोकसभा चुनाव से पंजाब में अकाली 10 सीटों पर और बीजेपी 3 सीटों पर चुनाव लड़ती आई है. लेकिन इस चुनाव में बीजेपी अकाली पर ज्यादा सीटें देने का दबाव बना सकती है.

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लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान लुधियाना सीट में कुल 15,61,201 मतदाता थे, जिसमें से 11,00,457 वोटर्स ने अपने मत का इस्तेमाल किया था. उस समय पुरुष वोटर्स की संख्या 8,35,632 और महिला वोटर्स की संख्या 7,25,569 थीं. जबकि 3,220 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था. जबकि चुनाव के दौरान लुधियाना लोकसभा क्षेत्र में कुल 1328 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे.

लुधियाना लोकसभा क्षेत्र के अंदर 9 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें लुधियाना पूर्वी, लुधियाना दक्षिण, अतम नगर, लुधियाना सेंट्रल, लुधियाना पश्चिम, लुधियाना उत्तर, गिल्ल (सुरक्षित), ठखा और जगरोन (सुरक्षित) है.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

43 साल के कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा में 16वीं कार्यकाल के दौरान 51 डिबेट में हिस्सा लिया. जबकि ये 5 प्राइवेट मेंबर बिल पास कराने में सफल रहे हैं. रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा में अभी तक 430 सवाल पूछ चुके हैं. वहीं सरकारी आंकड़ा कहता है कि कांग्रेसी सांसद ने अपने क्षेत्र के विकास के लिए करीब 85 फीसदी सांसद निधि कोष का इस्तेमाल किया है.      

गौरतलब है कि पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं, 2014 के चुनाव में बीजेपी-अकाली गठबंधन को यहां 6 सीटों में जीत मिली थी. पंजाब में अकाली दल 10 सीटों पर और बीजेपी 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. 2014 में अकाली में 10 में से 4 पर जीत मिली थी, और बीजेपी की 3 में से 2 सीट पर जीत हुई थी.

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लुधियाना का इतिहास

इतिहास के नजरिये से देखें तो लुधियाना का पहले नाम लोदी-आना था, जो कि लोदी वंश के नाम पर था. यहां का कपड़ा निर्माण, ऊनी वस्त्र, मशीन टूल्स, मोपेड, और सिलाई मशीनों के इंजीनियरिंग केंद्र हैं. पर्यटन के लिहाज से यहां ऐतिहासिक स्मारक लोधी किला है, जो करीब 500 वर्ष पुराना है, इसे मुस्लिम शासक सिकंदर लोदी ने सतलुज नदी के तट पर बनवाया था. लुधियाना के उत्तर-पश्चिम में पीर-ई-दस्तगीर का मंदिर है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों तीर्थयात्री पहुंचते हैं. 1962 में स्थापित विश्व प्रसिद्ध पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना में ही है.

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