उत्तर प्रदेश की एटा लोकसभा सीट 2019 के चुनाव से काफी वीआईपी सीट मानी जा रही है. 2014 में हुए चुनाव में यहां से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे. एटा के पटियाली में ही मशहूर सूफी संत अमीर खुसरो का जन्म हुआ था. ऐसे में ना सिर्फ राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ जाता है.
एटा लोकसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि
कानपुर और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सटे एटा में पहला चुनाव कांग्रेस ने जीता था. लेकिन उसके बाद यहां से हिंदू महासभा ने भी 1957 और 1962 में जीत दर्ज की थी. हालांकि, उसके बाद 1967 और 1971 का चुनाव जीत कांग्रेस ने यहां से वापसी की. लेकिन 1977 में चली कांग्रेस विरोधी लहर में चौधरी चरण सिंह की भारतीय लोकदल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1980 के हुए चुनाव में यहां से आखिरी बार कांग्रेस जीत पाई थी.
उसके बाद 1984 में लोक दल के जीत दर्ज करने के बाद ये सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई. 1989, 1991, 1996 और 1998 में यहां भारतीय जनता पार्टी के महकदीप सिंह शाक्य ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1999 और 2004 एटा से लगातार दो बार समाजवादी पार्टी का परचम लहराया. 2009 के लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी से अलग हो अपनी पार्टी बना यहां से चुनाव लड़ा और जीता.
पिछले चुनाव में कल्याण सिंह माने और उनके बेटे राजवीर सिंह को टिकट मिला. राजवीर सिंह ने दोगुने अंतर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को मात दी.
एटा लोकसभा सीट का समीकरण
जातीय समीकरण के अनुसार एटा का क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है. एटा क्षेत्र में लोध, यादव और शाक्य जातीय बहुल है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर करीब 16 लाख मतदाता थे, जिसमें से 8.5 लाख पुरुष और 7.2 लाख महिला मतदाता हैं.
एटा लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें कासगंज, अमॉपुर, पटियाली, एटा और मारहरा विधानसभा सीटें शामिल हैं.
बता दें कि बीते साल 26 जनवरी, 2018 को कासगंज में निकली तिरंगा यात्रा पर काफी बवाल हुआ था. यहां हुई हिंसक झड़प में एक युवक की मौत हो गई थी. इस मुद्दे पर काफी राजनीतिक बवाल भी हुआ था और राज्य की योगी सरकार की काफी आलोचना हुई थी.
2014 में क्या था जनादेश
2014 में चली मोदी लहर का फायदा एटा में भी मिला और भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी को सीधे तौर पर करारी मात दी. बीजेपी के राजवीर सिंह को 2014 में यहां करीब 51 फीसदी वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिदंव्दी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को सिर्फ 29 फीसदी वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में यहां कुल 58 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें से 6200 वोट NOTA में गए थे.
सांसद का प्रोफाइल और प्रदर्शन
स्थानीय सांसद राजवीर सिंह अपने क्षेत्र में राजू भैया के नाम से मशहूर हैं. कल्याण सिंह जैसे बड़े राजनेता का बेटा होने के कारण उन्हें राजनीति विरासत में मिली. हालांकि, सांसद चुने जाने से पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा. 2002 में वह विधायक चुने गए और 2003 से 2007 तक की यूपी सरकार में मंत्री भी रहे.
2014 में वह राष्ट्रीय राजनीति में आए और एटा से उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता. इस समय वह संसद की कई कमेटियों का हिस्सा भी हैं. ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास करीब 25 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. अपनी सांसद निधि से उन्होंने करीब 81 फीसदी राशि खर्च की है.