झारखंड की लोहरदगा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सुदर्शन भगत ने शानदार जीत हासिल की है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सुखदेव भगत को 10363 वोटों से करारी शिकस्त दी है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सुदर्शन भगत को 371595 वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सुखदेव भगत को 361232 वोटों से संतोष करना पड़ा.
झारखंड की लोहरदगा लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को चौथे चरण में मतदान हुए थे. यहां से 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने चुनाव मैदान में उतरे थे. चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार लोहरदगा लोकसभा सीट पर 66.23 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया था.
इस संसदीय क्षेत्र में कुल 12 लाख 27 हजार 606 मतदाता पंजीकृत हैं, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में कुल 8 लाख 13 हजार 40 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
जानिए इस चुनाव में किसको कितने वोट मिले
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ये उम्मीदवार थे चुनाव मैदान में
लोहरदगा संसदीय सीट पर बीजेपी ने तीसरी बार लगातार जीत दर्ज की है. यहां से बीजेपी ने सुदर्शन भगत को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि कांग्रेस के टिकट से सुखदेव भगत चुनाव लड़े थे. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी ने श्रवण कुमार पन्ना, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने दिनेश उरांव को चुनावी मैदान में उतारा था. इस बार यहां से कुल 14 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की थी, जिनमें 9 उम्मीदवार निर्दलीय थे. लोहरदगा लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी.
साल 2014 में किसने मारी बाजी
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के सुदर्शन भगत ने कांग्रेस के रामेश्वर ओरेन को करीबी मुकाबले में हराया था. सुदर्शन भगत को करीब 2 लाख 26 हजार और रामेश्वर ओरेन को लगभग 2 लाख 20 हजार वोट मिले थे. पिछली बार इस सीट पर करीब 58 फीसदी मतदान हुआ था. अभी तक लोहरदगा लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती रही है. पिछले दो चुनाव से बीजेपी के सुदर्शन भगत जीत रहे हैं. वो मोदी सरकार में मंत्री भी हैं.
लोहरदगा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 1962 में इस सीट पर कांग्रेस के डेविड मुंजिन जीते थे. इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर कार्तिक ओरेन लगातार दो बार (1967 और 1971) चुनाव जीते थे. हालांकि साल 1977 का चुनाव कार्तिक हार गए थे और जनता पार्टी लालू ओरेन जीतने में कामयाब हुए थे. साल 1980 में कार्तिक ओरेन ने फिर इस सीट पर जीत दर्ज की. साल 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर सुमति ओरेन जीते थे.
साल 1991 में इस सीट पर बीजेपी का खाता खुला और उसके प्रत्याशी ललित ओरेन जीते थे. साल 1996 में भी ललित ओरेन ने जीत दर्ज कर थी और भगवा पताका फहराया था. साल 1998 में कांग्रेस के इंद्र नाथ भगत जीतने में कामयाब हुए थे. साल 1999 में बीजेपी के दुखा भगत जीते थे. साल 2004 में कांग्रेस के रामेश्वर ओरेन जीते थे. इसके बाद साल 2009 और 2014 का चुनाव बीजेपी के सुदर्शन भगत जीते थे.
कैसा है सामाजिक तानाबाना
लोहरदगा लोकसभा सीट पर अनुसूचित जाति की तादात करीब 2.69 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की तादात करीब 64.04 फीसदी है. इस सीट की 96 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 11.19 लाख है, जिसमें से 5.78 लाख पुरुष और 5.40 लाख महिला मतदाता शामिल हैं.
इस लोकसभा सीट के तहत मान्डर, गुमला, लोहरदगा, सिसई और बिशुनपुर विधानसभा सीटें आती हैं. साल 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने तीन सीटों (मान्डर, गुमला, सिसई), झामुमो ने एक सीट (बिशुनपुर) और आजसु पार्टी (लोहरदगा) पर जीत दर्ज की थी.
यह सीट रांची, गुमला और लोहरदगा जिले में फैली हुई है. यह पूरा इलाका भी रेड कॉरिडोर का हिस्सा है. लोहरदगा सीट पर अनुसूचित जनजाति का खास दबदबा है. अपने समृद्ध खनिज भंडार जैसे बॉक्साइट और लेटराइट के कारण यह इलाका प्रसिद्ध है. हालांकि खनिज भंडार के बावजूद इसकी पहचान आर्थिक रूप से पिछड़े इलाके में होती है.
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