पश्चिम बंगाल की झारग्राम लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार कुंवर हेम्ब्रम ने तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी बिरबाहा सरेन को हराया है. कुंवर हेम्ब्रम ने 11767 वोटों से जीत हासिल की है.
किसको कितने वोट मिले
कब और कितनी हुई वोटिंग
झारग्राम सीट पर लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को वोटिंग हुई और 85.39 फीसदी मतदान हुआ. इस सीट पर कुल 9 कैंडिडेट चुनावी मैदान में उतरे.
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कौन-कौन उम्मीदवार2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की झारग्राम लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस बार डॉ कुंवर हेम्ब्रम पर दांव खेला तो वहीं कांग्रेस की ओर से जगेश्वर हेम्ब्रम और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बिरबाहा सरेन चुनाव मैदान में उतरे.
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2014 का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में झारग्राम लोकसभा सीट पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की डॉक्टर उमा सरीन ने सीपीएम के डॉक्टर पुलिन बिहारी को हरा दिया था. उमा सरीन को 674504 वोट मिले तो पुलिन बिहारी को 326621 वोट मिले. 2014 के चुनाव में यहां पर 85.26% फीसदी वोटिंग हुई थी. जबकि 2009 में 77.19 फीसदी. 2014 के चुनाव में AITC को 53.63 फीसदी, सीपीएम को 25.97 फीसदी, बीजेपी को 9.74 फीसदी और कांग्रेस को 3.22 फीसदी वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
झारग्राम संसदीय क्षेत्र पश्चिम मेदिनीपुर और पुरुलिया जिले में स्थित है. यह संसदीय सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस संसदीय क्षेत्र में बंगाली और हिंदू समाज का आधिपत्य है. बंगाली उर्दू और हिंदी शहर में बोली जाती है. यहां की औसत साक्षरता दर 80% है. 86 फीसदी पुरुष साक्षर हैं जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 76 फ़ीसदी है. यहां बहुत से कॉलेज और स्कूल हैं जहां पर हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी में पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है.
2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 2135425 है. इसमें से 94.37 फीसदी आबादी शहरी है जबकि 5.27 फीसदी आबादी शहरी. अनुसूचित जाति और जनजाति का रेश्यो 18.24 फीसदी और 25.76 फीसदी है. 2017 की जनगणना के अनुसार झारग्राम में मतदाताओं की संख्या 1571180 है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
1962 में झारग्राम संसदीय सीट का गठन हुआ. इस सीट पर पहली सफलता कांग्रेस को मिली, इसके बाद एक क्षेत्रीय दल का सदस्य विजयी हुआ. इसके बाद सीपीएम ने इस पर कब्जा कर लिया और 2009 तक इस सीट पर काबिज रही. पहले जो लड़ाई कांग्रेस से होती थी वह अब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के साथ होने लगी. 1962 के चुनाव में कांग्रेस के सुबोध हंसदा चुनाव जीते. 1967 में बीएसी के एके किस्कू को विजय मिली.
साल 1971 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अमिय कुमार किस्कू को सफलता मिली. 1977 के चुनाव में जरूरत सीपीएम के जादूनाथ किस्कू ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली. 1980 में सीपीएम के हसदा मतिलाल सांसद बने. 1984 और 1989 में भी सीपीएम के मतिलाल हसदा चुनाव जीते. 1991,1996,1998,1999 में सीपीएं के रूपचंद मुर्मू यहां से चुनाव जीतते रहे. 2004 में सीपीएम के डी पुलिन बिहारी सांसद चुने गए.
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