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Hooghly Lok Sabha Chunav Result 2019: BJP के लॉकेट चटर्जी ने TMC की रत्ना को हराया

Lok Sabha Chunav Hooghly Result 2019 पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी ने जीत दर्ज की है, उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी टीएमसी उम्मीदवार रत्ना डे को मात दी है.

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Hooghly Lok sabha Election Result 2019
Hooghly Lok sabha Election Result 2019

पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी ने जीत दर्ज की है, उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी टीएमसी उम्मीदवार रत्ना डे को मात दी है.देखिए किस पार्टी के उम्मीदवार को कितने वोट मिलें.

hooghly_052319093145.jpgकिसको कितने वोट मिले

कब और कितनी वोटिंग

हुगली सीट पर लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के तहत 6 मई को वोट डाले गए और कुल 82.47 फीसदी मतदान हुआ.

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कौन-कौन उम्मीदवार

हुगली लोकसभा सीट पर बीजेपी की ओर से लॉकेट चटर्जी चुनाव लड़े तो वहीं कांग्रेस ने प्रतुल साहा को अपना उम्मीदवार बनाया. सीपीआई (एम) की ओर से प्रदीप साहा, तृणमूल कांग्रेस से डॉ. रत्ना डे चुनाव मैदान में उतरीं. पिछली बार यहां से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को जीत मिली थी.

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2014 का जनादेश

हुगली संसदीय सीट से टीएमसी की डॉक्टर रत्ना डे ने सीपीएम के प्रदीप साहा को हराया था. डॉक्टर रत्ना डे को 6,14,312 वोट मिले. वहीं सीपीएम के प्रदीप साहा को 4,25,228 वोट मिले. तकरीबन 1 लाख 90 हजार वोटों से सीपीएम को पराजय मिली. 2014 के चुनाव में कुल 82.88 फीसदी वोटिंग हुई जबकि 2009 में 82.71 फीसदी वोटिंग हुई थी. 2014 में AITC को 49.37 फीसदी CPM को 42.36 फीसदी और बीजेपी को 3.42 फीसदी वोट मिले.

सामाजिक ताना-बाना

2011 की जनगणना के मुताबिक इस जिले की कुल आबादी 2137310 है. इसमें 58.34 फीसदी ग्रामीण आबादी है और 41.66 फीसदी शहरी. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का रेश्यो यहां 26.7 और 7.37 फीसदी है. इसका जनसंख्या घनत्व 1753 व्यक्ति प्रति स्क्वायर किलोमीटर है. 6 साल से कम उम्र के बच्चों का लिंगानुपात 961 है. यहां की साक्षरता दर 81.80 है. पुरुष साक्षरता दर 87.03 तो महिला साक्षरता दर 76.36 फीसदी है. यहां की आधिकारिक भाषा बंगाली है. जबकि हिंदी और अंग्रेजी भी बहुतायत में बोली जाती है.

सीट का इतिहास

1952 में जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी तब भी यहां से कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं जीता था. 1952 में एचएमएस के एनसी चटर्जी जीते थे, उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था. 1957 और 1962 में सीपीआई के प्रोवत कार जीते. 1967 में सीट पर सीपीएम ने कब्जा कर लिया और सीपीएम के बीके मोदक सांसद चुने गए. 1977 में भी सीपीएम के बीके मोदक दोबारा सांसद चुने गए.

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1980 में सीपीएम के रूपचंद पाल विजयी हुए. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब पूरे देश में सहानुभूति की लहर चल रही थी तो यह क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा और 1984 के चुनाव में कांग्रेस की इंदुमती भट्टाचार्य यहां से चुनाव जीत गईं. इसके बाद सीपीएम ने फिर वापसी की और 1989 में रूपचंद पाल सांसद चुने गए. 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 तक सीपीएम के उम्मीदवार के तौर रूपचंद पाल यहां से सांसद चुने जाते रहे. 2009 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की डॉग रत्ना डे ने 6 बार से सांसद रहे सीपीएम के दिग्गज नेता को हरा दिया. 2014 में भी डॉक्टर रत्ना डे ने अपनी जीत कायम रखी.

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