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चौधरी अजित सिंह को विरासत में मिली राजनीति, कई सरकारों में रहे मंत्री

बागपत को राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) का गढ़ माना जाता है. एक तरफ जहां चौधरी चरण सिंह ने इस सीट से कई बार जीत हासिल की तो वहीं उनके बेटे अजित सिंह ने लगातार 6 बार चुनाव में जीत दर्ज की.

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चौधरी अजित सिंह
चौधरी अजित सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के इकलौते चौधरी अजित सिंह को राजनीति विरासत में मिली है. अजित सिंह राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष हैं और उन्होंने जाटों के मसीहा के रूप में अपनी पहचान बनाई है.

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह का जन्म 12 फरवरी 1939 को मेरठ के भदोला गांव में हुआ. अजित सिंह ने लखनऊ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद आईआईटी खड़गपुर में पढ़ाई की. इसके बाद वो अमेरिका के इलिनाइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी में पढ़े और फिर वहीं नौकरी करने लगे.

अजित सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री रहे. 15 साल से ज्यादा वक्त तक विदेश में नौकरी करने के बाद अजित सिंह भारत लौट आए. अजित सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह जब बीमार हुए तो उन्होंने अपने बेटे को लोक दल की जिम्मेदारी सौंप दी.

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अजित सिंह 1986 में पहली बार राज्यसभा के सांसद बने. इसके बाद अजित सिंह को 1987 में लोक दल का अध्‍यक्ष बनाया गया और 1988 में वह जनता पार्टी के अध्‍यक्ष बने. अजित सिंह ने 1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और फिर उन्हें लगातार बागपत सीट से जीत मिलती रही. बागपत को आरएलडी का गढ़ माना जाता है. एक तरफ जहां चौधरी चरण सिंह ने इस सीट से कई बार जीत हासिल की तो वहीं उनके बेटे अजित सिंह ने लगातार 6 बार चुनाव में जीत दर्ज की.

दो बार किया हार का सामना

आरएडी नेता अजित सिंह 1989 के बाद से लगातार सांसद रहे हैं. हालांकि अजित सिंह को अपने राजनीतिक करियर में दो बार हार का सामना भी करना पड़ा. अजित सिंह पहली बार बीजेपी के सोमपाल शास्त्री से हारे थे तो वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के ही सत्यपाल से हार गए थे. दरअसल, 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी से भी जाट नेता के मैदान में उतरने से अजित सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा था. उस वक्त जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले और बागपत के रहने वाले सत्यपाल बीजेपी के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे थे.

कई सरकार में रहे मंत्री

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अजित सिंह नरसिंह राव की सरकार से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी और फिर मनमोहन सिंह की सरकार तक में केंद्रीय मंत्री के रूप में अहम भूमिका निभा चुके हैं. अजित सिंह ने अलग-अलग सरकारों में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है. वाजपेयी की सरकार में अजित सिंह केंद्रीय कृषि मंत्री रहे तो 2011 में मनमोहन सिंह की सरकार में वह नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके हैं.

2014 में हारने के बाद अजित सिंह ने 2019 लोकसभा चुनाव में बागपत लोकसभा सीट से चुनाव में ना उतरने का फैसला किया है. आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह इस बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे जबकि उनके बेटे और आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी बागपत से चुनाव मैदान में हैं. यह पहली बार है जब अजित सिंह बागपत के अलावा किसी दूसरी सीट से मैदान में उतरे हैं.

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