scorecardresearch
 

गया: बिहार का ऐसा जिला जो हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों का केंद्र

बौद्ध और जैनधर्म के अलावा हिंदू धर्म में इस मंदिर को अहम स्थान मिला हुआ है. मान्यता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है.

बौद्ध धर्म के साथ ही जैन धर्म का भी केंद्र है गया बौद्ध धर्म के साथ ही जैन धर्म का भी केंद्र है गया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बौद्ध और जैन धर्म का अहम केंद्र है गया
  • गया हिंदू धर्म में पिंडदान की सबसे अहम जगह
  • मौर्य काल में अशोक ने यहां से बौद्ध धर्म का प्रसार किया

गया बिहार की सबसे प्रसिद्ध और पुरानी जगहों में से एक है. गया की सीमा झारखंड से लगती है. यह बिहार की राजधानी पटना के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. फाल्गु नदी के किनारे बसे गया का उल्लेख महाकाव्य रामायण और महाभारत में भी मिलता है. मेगस्थनीज की इंडिका और फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा वर्णन में भी गया का वर्णन एक समृद्ध धर्म क्षेत्र के तौर पर आता है. गया से 17 किलोमीटर की दूरी पर बोधगया स्थित है जो बौद्ध तीर्थ स्थल है और यहीं बोधि वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी.

1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की जीत के बाद बिहार का दीवानी और राजस्व अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी के पास चला गया. 1864 तक गया तत्कालीन बेहार और रामगढ़ जिलों का हिस्सा बना रहा. 1865 में में गया को एक पूर्ण जिले के रूप में मान्यता मिली. 1976 में गया जिले को दो हिस्सों में बांटकर औरंगाबाद एवं नवादा बनाए गए. गया में ही बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री अनुराग नारायण सिन्हा का भी जन्म हुआ था. 

बौद्ध और जैन धर्म का अहम केंद्र 
मगध क्षेत्र में आने वाले गया ने समय के साथ कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. ईसा पूर्व छठी सदी से लेकर 18वीं सदी तक के करीब 2300-2400 साल में यह इस क्षेत्र का ही नहीं देश का भी अहम सांस्कृतिक नगर रहा है. बिम्बसार के काल में इस जमीन पर गौतम बुद्ध और महावीर जैन ने भी अपना प्रभाव छोड़ा था. नंद वंश के कम समय के शासन के बाद मौर्य काल में अशोक ने यहां से बौद्ध धर्म का काफी प्रसार किया. गया मौर्य काल में एक महत्वपूर्ण नगर हुआ करता था. यहां खुदाई के दौरान अशोक का आदेश पत्र भी मिला है. 1787 में यहां होल्कर वंश (बुंदेलखंड) की महारानी अहिल्याबाई ने विष्णुपद मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था.

हिंदू धर्म में पिंडदान की सबसे अहम जगह
1981 में बिहार राज्य सरकार ने गया, नवादा, औरंगाबाद और जहानाबाद को मिलाकर मगध प्रमंडल बनाया. उत्तर प्रदेश के वाराणसी की तरह गया की प्रसिद्धि मुख्य रूप से एक धार्मिक नगरी की है। पितृपक्ष के मौके पर यहां हजारों श्रद्धालु पिंडदान के लिए आते हैं. गया बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थानों में से एक है. यह शहर हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए काफी अहम है. यहां का विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है. मान्यता है कि हिंदुओं के आराध्य विष्णु के पांव के निशान पर इस मंदिर को बनाया गया है. हिंदू धर्म में इस मंदिर को अहम स्थान मिला हुआ है. कहा जाता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है. रामायण में कहा गया है कि राम ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान गया में ही किया था. 

गया का सामाजिक तानाबाना
2011 की जनगणना के अनुसार गया जिले की आबादी करीब 43.92 लाख है. गया के लिंगानुपात महिलाएं पुरुषों के मुकाबले काफी कम हैं. यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 932 महिलाएं हैं. गया जिले में साक्षरता की दर 66.35% है. 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की 51.36% आबादी हिंदीभाषी है. करीब 41.37% लोग मगही बोलते हैं तो 7.04% फीसदी लोगों की बोलचाल की भाषा उर्दू है. इस जिले की 80 फीसदी आबादी हिंदू, 11 फीसदी बौद्ध, 8.45 फीसदी मुस्लिम और 1 फीसदी ईसाई है.

गया जिले की राजनीतिक तस्वीर
गया जिले में गया (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) लोकसभा सीट आती है. इस सीट पर अब तक कांग्रेस पार्टी को पांच बार जीत मिली है तो चार बार भाजपा और एक बार जनसंघ के उम्मीदवार भी जीते हैं. एक बार यह सीट आरजेडी के खाते में भी गई है. फिलहाल यह सीट जेडीयू के पास है. इसके अलावा औरंगाबाद और जहानाबाद लोकसभा सीट का कुछ हिस्सा भी गया जिले में आता है. विधानसभा सीटों की बात करें तो जिले में 10 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें छह विधानसभा सीटें- शेरघाटी, बाराचट्टी, बेलागंज, बोधगया, गया टाउन, वजीरगंज, गया लोकसभा सीट के तहत आती हैं तो तीन सीट- गुरूआ, इमामगंज और टिकारी सीटें औरंगाबाद और एक सीट (अतरी) जहानाबाद में आती है. गया की छह विधानसभा सीटों में से 3 सीटें आरजेडी के पास हैं और कांग्रेस, भाजपा और जेडीयू के खाते में एक-एक सीट है. औरंगाबाद लोकसभा सीट के तहत आने वाली तीन विधानसभा सीटों में से एक सीट भाजपा, एक सीट जेडीयू और एक सीट HAM के पास है. जहानाबाद में आने वाली एक सीट आरजेडी के पास है. 

गया के प्रमुख स्थल

विष्णुपद मंदिर
30 मीटर ऊंचे इस मंदिर में आठ खंभे हैं. इन खंभों पर चांदी की परतें चढ़ाई गई हैं. मंदिर के गर्भगृह में विष्णु देव के 40 सेमी लंबे पांव के निशान बताए जाते हैं.

वैष्णव मठ
स्वामी धरणीधराचार्य द्वारा स्थापित किया गया भोरी का वैष्णव मठ वैदिक शिक्षा और हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है. बराबर पर्वत पर सिद्धनाथ और दशनाम मंदिर नागाओं के आस्था के केंद्र हैं.

जामा मस्जिद
बोध गया मंदिर के पीछे करीब 200 साल पुरानी जामा मस्जिद है. इसमें हजारों लोग साथ नमाज अदा कर सकते हैं. मुख्य नगर से 10 किमी दूर गया-पटना मार्ग पर एक पवित्र धर्मिक स्थल है. यहां नौवीं सदी में सूफी सत हजरत मखदूम सैयद दरवेश अशरफ ने खानकाह अशरफिया की स्थापना की थी. देश भर से यहां लोग दर्शन के लिए आते हैं. 

कोटेश्ववरनाथ और चोवार का शिव मंदिर
यह प्राचीन शिव मंदिर मोरहर-दरधा नदी के संगम किनारे मेन-मंझार गांव में है. यहां हर साल शिवरात्रि में मेला लगता है. चोवार गांव में भी एक प्राचीन शिव मंदिर है जहां सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं. 

सूर्य मंदिर और ब्रह्मयोनि मंदिर
प्रसिद्ध सूर्य मंदिर सोन नदी के किनारे स्थित है. दीपावली के छह दिन बाद बिहार के लोकप्रिय पर्व छठ पर्व पर यहां काफी तीर्थयात्री आते हैं. इसके अलावा ब्रह्मयोनि पहाड़ी की चोटी पर 440 सीढ़ियां चढ़कर शिखर पर एक शिव मंदिर बना है. यहां पर लोग दूर-दूर से पिंडदान करने आते हैं. 

मंगला गौरी
यह मंदिर शक्ति को समर्पित है. इसे 18 महाशक्तिपीठों में शुमार किया जाता है. 

बराबर गुफा
बराबर गुफा गुफा गया से 20 किमी दूर है. इस गुफा तक पहुंचने के लिए 7 किमी पैदल और 10 किमी रिक्शे या तांगे से चलना होता है. यह गुफा बौद्ध धर्म के लिए काफी अहम है. यह बराबर और नागार्जुनी श्रृंखला के पहाड़ पर स्थित है.

नियाजीपुर देवी मंदिर 
नियाजीपुर का देवी मंदिर सन 1961 में बना था. इसे नियाजीपुर के मूल निवासी राम उग्रह सिंह ने बनाया था. 

बोधगया
बोधगया बौद्ध धर्म की राजधानी है. जिस पीपल के पेड़ के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था वो बोधिवृक्ष बौद्ध आस्था का केंद्र है.

थाई मॉनस्ट्री 
यह बोधगया का सबसे पुराना विदेशी मठ है जो थाई स्थापत्य शैली में बनी है. यह अंदर और बाहर दोनों से विस्मयकारी तौर पर भव्य है. 

गया जिले के प्रमुख अधिकारी
गया जिले के डीएम अभिषेक सिंह हैं. उनकी ई-मेल आईडी dm-gaya.bih@nic.in     है. उनसे टेलीफोन नंबर- 0631-2222900 और फैक्स नंबर- 0631-2223561 पर संपर्क किया जा सकता है. मगध डिविजन के कमिश्नर असंगबा चुबा हैं. उनकी ई-मेल आईडी divcom-magadh-bih@nic.in है. उनसे फोन नंबर- 0631-2225821 और फैक्स नंबर- 0631-2221641 प संपर्क किया जा सकता है. गया के एसएसपी रजीव मिश्रा हैं. उनसे sp-gaya-bih@nic.in  पर संपर्क किया जा सकता है. उनका टेलीफोन नंबर 0631-2225901 है. 
 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें