हमारी जिंदगी में दो लोग बेहद अहम होते हैं. हम अपनी तमाम उम्र दुनिया को जिस नजरिए से देखते हैं. अपनी जिंदगी में गलतियों से सबक लेकर सफलता की जिस राह पर आगे बढ़ते हैं, उस रास्ते को दिखाने की शुरुआत दो लोगों से होती है. पहले हमारे माता-पिता और दूसरे शिक्षक. माता-पिता जिंदगी जीने के तौर तरीके सिखाते हैं और शिक्षक हमारे भीतर छिपे उस जज्बे से हमारी पहचान करवाता है, जिसके दमपर हम सफलता के आसमान में अपने हुनर का सितारा टांक देते हैं.
एक बेहतरीन शिक्षक अपने समाज की कई पीढ़ियों को संवार देता है. आज के समय में जब शिक्षा एक कारोबार बन चुकी है और हर दिन ये महंगी होती जा रही है, ऐसे दौर में केरल के एक शिक्षक ने जबरदस्त नजीर पेश की है. वो अपना बहुमूल्य ज्ञान किसी कोचिंग या फिर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचने की बजाय मुफ्त में बांट रहा है. केरल के इस शिक्षक का नाम है पी.विनोद कुमार.
आज के दौर में पी.विनोद कुमार जैसे टीचर का मिलना कोई साधारण बात नहीं है. उनकी क्लासेज पूरी तरह से फ्री हैं. वो बड़ी बिल्डिंंग के सेटअप की बजाय अपने छात्रों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पढ़ा रहे हैं. अपनी पढ़ाने की काबलियत की बदलौत वो ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी छा रहे हैं. आइए जानते हैं केरल के एक गवर्मेंट कॉलेज के Associate professor पी. विनोद कुमार के बारे में...
व्हॉट्सएप पर पढ़ाई, न कोई दबाव-न कोई फीस
एसोसिएट प्रोफेसर पी. विनोद कुमार एक मैथ्स टीचर हैं और बच्चों को सिर्फ कॉलेज में ही नहीं बल्कि व्हॉट्सएप के जरिए भी पढ़ाते हैं. इस व्हॉट्सएप ग्रुप की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जब उन्हें महसूस हुआ कि छात्रों को उनकी जरूरत है.
अपनी 6 साल लंबी यात्रा के बारे में पी. विनोद कुमार बताते हैं कि वे किसी भी छात्रों से किसी तरह की फीस नहीं लेते हैं और न ही उनपर किसी तरह का दबाव होता है. उनका कहना है कि जिन छात्रों को मैंने पढ़ाया है, वे आज मेरे लिए एक रिसोर्स के रूप में साबित हो रहे हैं. कई बार मेरे पढ़ाए हुए छात्र ही ऑनलाइन क्लासेज लेने आते हैं, लेकिन किसी पर ऐसा करने के लिए जोर नहीं डालता.
16 छात्रों से हुई थी शुरुआत, आज 5 हजार के पार
आजतक डिजिटल ने पी. विनोद कुमार से खास बातचीत की और उनसे जाना कि कैसे उन्होंने महज 16 लोगों के व्हॉट्सएप ग्रुप को आज लगभग 5,000 से ज्यादा लोगों का ग्रुप बना दिया. वे व्हॉट्सएप के ही जरिए बच्चों से सवाल लेते और उनके डाउट क्लियर करते. ऐसे करते-करते धीरे-धीरे ना सिर्फ उनके कॉलेज के बच्चों को इस ग्रुप का पता चला बल्कि आसपास के कॉलेजों के बच्चों को भी इस ग्रुप के बारे में पता चला और धीरे-धीरे वे इस ग्रुप से जुड़ते गए.
'कोरोना काल' ने बदली किस्मत!
पी. विनोद कुमार बताते हैं कि पहले उन्होंने नहीं सोचा था कि आगे जाकर ये ग्रुप इतना बड़ा बन जाएगा. ये ग्रुप उन्होंने छोटे रूप में शुरू किया था. आगे वे बताते हैं कि साल 2020 में कोविड आया और सारी चीजें ऑनलाइन हो गईं तो उन्हें लगा कि बच्चे ऐसे समय में विषय में अपनी रुची खो देंगे. इसलिए उन्होंने गूगल फॉर्म के जरिए क्वेचन पेपर बनाए और उन्हें सभी छात्रों में शेयर किया.
यही वो समय था जब छात्रों को सबसे ज्यादा इस ग्रुप के बारे में पता चला. सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और श्रीलंका से भी छात्र इस ग्रुप से जुड़ने लगे. इस व्हॉट्सएप ग्रुप का असर इतना हुआ कि न सिर्फ वे परीक्षा में अच्छे अंक लाने लगे बल्कि कई छात्रों का एडमिशन IIT जैसे संस्थानों में भी हुआ.
पहला नेशनल वेबिनार और...
पी. विनोद कुमार बताते हैं कि 2020 के टाइम पर ही हमने कई सारे वेबिनार आयोजित किए. साल 2020 का 15 अगस्त उनके लिए बहुत अच्छा साबित हुआ, क्योंकि 15 अगस्त 2020 के दिन ही उन्होंने अपना पहला नेशनल वेबिनार आयोजित किया था. और अब तक वे ऐसे 8 नेशनल वेबिनर कंडक्ट कर चुके हैं, जिसमें बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट से प्रोफेसर लेक्चर देने आते हैं और ये छात्रों के लिए बहुत अच्छे साबित हुए हैं.
इस समय पी. विनोद कुमार की क्लासेज के 6 अलग-अलग व्हॉट्सएप ग्रुप, 1 टेलिग्राम और 1 गूगल ग्रुप है जहां छात्र आसानी से जुड़ सकते हैं और आसानी से अपने डाउट क्लियर करवा सकते हैं. बता दें कि पी. विनोद कुमार अभी सिर्फ अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स और पीएचडी स्कॉलर को ही पढ़ाते हैं. वे फिलहाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को नहीं पढ़ाते. आपको ये जानने में जरूर हैरानी होगी कि वे इस ग्रुप को चलाने वाले अकेले ही हैं. वे खुद ही इन सारे छात्रों से कनेक्ट करते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी काउंसलिंग भी करते हैं.
पिता के देहांत के बाद मंदिर में किया काम
अपने संघर्ष के बारे में डॉ पी. विनोद बताते हैं कि खराब वित्तीय स्थिति के कारण और पिताजी के देहांत के बाद उन्हें अपनी डिग्री के लिए खुद पैसे कमाने पड़े. उन्होंने मंदिर में पुजारी के सहायक के रूप में काम किया जिसके बदले में उन्हें कुछ पैसे मिल जाते थे.
बता दें कि डॉ विनोद कुमार का जन्म 30 मई 1980 में केरल के मल्लपुरम जिले में हुआ. पी विनोद कुमार ने कालीकट की यूनिवर्सिटी से एमएससी मैथमैटिक्स में कंप्लीट की और उसी यूनिवर्सिटी से गणित में उन्होंने पीएचडी की डिग्री भी हासिल की. इस समय वे ठूंचन मेमोरियल गवर्नमेंट कॉलेज, तिरूर में 2010 से एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं.