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International Labour Day 2022: क्यों मनाते हैं लेबर डे, कैसे हुई थी शुरुआत?

International Labour Day 2022: अगर यह कहा जाए कि दुनिया चलाने में मजदूरों की अहम भूमिका होती है तो यह गलत नहीं होगा. इन्हीं मजदूरों के समर्थन में दुनियाभर में एक मई को लेबर डे के रूप में मनाया जाता है. पर क्या आप जानते हैं कैसे हुई थी लेबर डे की शुरुआत?

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत में 1923 में हुई थी लेबर डे की शुरुआत
  • मजदूरों के सम्मान में मनाया जाता है लेबर डे

International Labour Day History: एक मई को दुनियाभर में लेबर डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है. ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है. इस दिन कई देशों में सार्वजनिक अवकाश होता है. लेबर डे की शुरुआत भारत में 1923 में हुई थी. लेबर डे कई देशों में अलग-अलग तारीखों को मनाया जाता है. लेकिन अधिकांश देशों में 1 मई को ही लेबर डे मनाते हैं. 

कैसे हुई थी लेबर डे की शुरुआत?
लेबर डे की शुरुआत अमेरिका में घटी एक घटना के बाद हुई. साल 1886 में मई डे के मौके पर अमेरिका के एक मजदूर संघ ने 16 घंटों की जगह 8 घंटे काम की मांग को लेकर स्ट्राइक की थी. इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने स्ट्राइक कर रहे मजदूरों पर शेलिंग की, जिसमें कई मजदूरों की जान चली गई. इस घटना के बाद विदेशों में एक आंदोलन शुरू हुआ. बता दें, 1916 तक अमेरिका ने 8 घंटे काम की मांग को मान्यता नहीं दी थी. 8 घंटे काम की मांग के साथा-साथ, मजदूरों ने उनके हक के लिए भी आवाज उठाई थी. 

भारत में कब और कैसे शुरू हुआ लेबर डे?
भारत में लेबर डे की शुरुआत 1923 में मद्रास (अब के चेन्नई) में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा हुई थी. इस दौरान लाल झंडे का इस्तेमाल किया गया था जो मजदूर वर्ग को प्रदर्शित करता है. लेबर डे के मौके पर दुनिया के 80 से अधिक देशों में छुट्टी होती है.

लेबर डे का क्या है महत्व?
दुनियाभर में लेबर डे मजदूरों के त्याग और बलिदान को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है. Labour Day मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है.

 

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