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CrPC Section 78: अधिकारिता के बाहर भेजे गए वारंट के बारे में बताती है सीआरपीसी 78

इस लेख में हम बात करेंगे सीआरपीसी (CrPC) की धारा 78 के बारे में, जो अधिकार क्षेत्र के बाहर निष्पादन के लिए अग्रेषित वारंट को लेकर प्रावधान बताती है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 78 इस बारे में क्या कहती है?

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अधिकार क्षेत्र के बाहर अग्रेषित गए वारंट से संबंधित है सीआरपीसी की धारा 78 अधिकार क्षेत्र के बाहर अग्रेषित गए वारंट से संबंधित है सीआरपीसी की धारा 78
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अधिकार क्षेत्र के बाहर भेजे गए वारंट से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) में अदालती कार्यवाही (Court proceedings) और कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित (Defined) किया गया है. इसी कड़ी में बात करेंगे सीआरपीसी (CrPC) की धारा 78 (Section 78) के बारे में, जो अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) के बाहर निष्पादन (Execution) के लिए अग्रेषित वारंट को लेकर प्रावधान (Provision) बताती है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 78 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 78 (CrPC Section 78)

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 78 (Section 78) में उस वारंट के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जिसे अधिकारिता क्षेत्र के बाहर निष्पादन (Execution) के लिए भेजा गया हो. CrPC की धारा 78 के अनुसार-

(1) जब वारंट का निष्पादन (Warrant executed) उसे जारी करने वाले न्यायालय (Court) की स्थानीय अधिकारिता (Local jurisdiction) के बाहर किया जाना है, तब वह न्यायालय ऐसा वारंट अपनी अधिकारिता के अंदर किसी पुलिस अधिकारी (Police officer) को निदिष्ट करने के बजाय उसे डाक (Post) द्वारा या अन्यथा किसी ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive magistrate) या जिला पुलिस अधीक्षक (District Superintendent of Police) या पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) को भेज सकता है जिसकी अधिकारिता का स्थानीय सीमाओं के अंदर उसका निष्पादन किया जाना है, और वह कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला अधीक्षक या आयुक्त उस पर अपना नाम पृष्ठांकित (Endorsed) करेगा और यदि साध्य (Achievable) है तो उसका निष्पादन इसमें इसके पूर्व उपबंधित रीति (Pre-provided manner) से कराएगा.

(2) उपधारा (1) के अधीन वारंट जारी करने वाला न्यायालय (Court issuing a warrant) गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध (Against the person) ऐसी जानकारी का सार (Substance of the information) ऐसी दस्तावेजों सहित, यदि कोई हो, जो धारा 81 (Section 81) के अधीन कार्रवाई करने वाले न्यायालय (Court of action) को, यह विनिश्चित (Decided) करने में कि उस व्यक्ति की जमानत (Bail) मंजूर की जाए या नहीं समर्थ (Able) बनाने के लिए पर्याप्त (Sufficient) हैं, वारंट के साथ भेजेगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 77: कहां निष्पादित हो सकता है वारंट, यही बताती है सीआरपीसी की धारा 77 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)

सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC

सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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