मुंबई की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 58 साल के एक अधेड़ को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इस शख्स पर पड़ोस में रहने वाले पांच साल के एक बच्चे को निर्वस्त्र करने, उसके प्राइवेट पार्ट्स को छूने, और उसके शरीर पर मास्टरबेट करने के आरोप थे. पीड़ित बच्चा उसे ‘मुर्गी वाले चाचा’ के नाम से बुलाता था.
अभियोजन के मुताबिक ये घटना 4 अप्रैल, 2018 की है. बच्चा अपने घर के बाहर खेलने गया था. वो घर वापस आया तो बहुत डरा और घबराया हुआ था. उसकी मां ने जब उससे पूछा कि क्या हुआ तो वो जवाब देने की जगह घर की पहली मंजिल पर भाग गया. परेशान मां भी पीछे गई. वहां जाकर उसने देखा कि बच्चा अपनी नेकर उतार कर सिर झुकाए बैठा था. मां के फिर वजह पूछने पर भी वो खामोश रहा. इस पर मां ने झिड़क कर उससे सारी बात बताने को कहा.
बच्चे ने फिर रोते-रोते मां को बताया कि जब वो खेल रहा था तो पड़ोस में रहने वाले मुर्गीवाले चाचा ने उसे 2 रुपये दिए और अपने घर में ले गया. वहां उसने लकड़ी के तख्त पर उसे लिटा कर गलत काम किया.
बच्चे की बात सुनकर मां के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा. वो तत्काल बच्चे को लेकर आरोपी के घर पहुंची. मां के बरसने पर आरोपी ‘मुर्गीवाले चाचा’ ने माफी मांगते हुए कहा कि ‘शैतान’ ने उस पर कब्जा कर लिया था जिसकी वजह से उसने गलत हरकत की.
बच्चे की मां ने फिर ये सारी बात अपने पति को बताई. इसके बाद मुंबई के वडाला टीटी स्टेशन पर केस दर्ज किया गया.
आरोपी ‘मुर्गीवाले चाचा’ का असल नाम मोहम्मद खातिर शाह है. जिस घर में वो किराए पर रहता है उसके मालिक ने भी कोर्ट में गवाही दी कि उसके सामने ही आरोपी ने बच्चे की मां के सामने ‘शैतानी गलती’ की बात मानते हुए माफी मांगी थी.
पॉक्सो कोर्ट के जज एम ए बरालिया ने कहा कि “अभियोजन की ओर से पेश सबूतों और गवाहों से बिना किसी शक साबित होता है कि आरोपी ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत दंडनीय अपराध किया है.”
सजा सुनाए जाते वक्त ‘मुर्गीवाले चाचा’ के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी और 5 बेटियां अपने पैतृक स्थान पर रहती हैं. उसकी तीन बेटियों की शादी हो चुकी है. उसके ऊपर दो बेटियों और पत्नी के अलावा दृष्टिहीन भाई की भी जिम्मेदारी है.”
बचाव पक्ष के वकीलों ने घर की खराब माली हालत को देखते हुए दोषी को सजा सुनाए जाते वक्त नर्मी बरतने की गुहार लगाई. वहीं अभियोजन ने अधिकतम सजा सुनाए जाने की मांग की. कोर्ट ने ‘मुर्गीवाले चाचा’ के घर की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए उसे न्यूनतम सजा सुनाई.