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रिकॉर्ड 75000 रुपये किलो बिकी गोल्डन बटरफ्लाई चाय, जानें क्या है खूबी

एक किलो 'गोल्डन बटरफ्लाई' चाय की बिक्री 75,000 रुपये की रकम में हुई है. 'गोल्डन बटरफ्लाई' एक खास चाय है, जिसका उत्पादन डिब्रुगढ़ के निकट दिकोम टी एस्टेट में किया गया है.

गोल्डन बटरफ्लाई चाय ने बनाया रिकॉर्ड (फोटो: ट्विटर से) गोल्डन बटरफ्लाई चाय ने बनाया रिकॉर्ड (फोटो: ट्विटर से)

गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (जीटीएसी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक इतिहास रच दिया है. एक किलो 'गोल्डन बटरफ्लाई' चाय की बिक्री 75,000 रुपये की रकम में हुई है. 'गोल्डन बटरफ्लाई' एक खास चाय है, जिसका उत्पादन डिब्रुगढ़ के निकट दिकोम टी एस्टेट में किया गया है.

इस दुकान ने खरीदा

जीटीएसी के सचिव दिनेश बिहानी ने कहा कि इस चाय को गुवाहाटी की सबसे पुरानी चाय दुकान 'मेसर्स असम टी ट्रेडर्स' ने अपने ग्राहकों के लिए खरीदा. उन्होंने पहले भी नीलामी में महंगी कीमतों पर कई स्पेशियलिटी चाय की खरीद की है.

बिहानी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, 'जीटीएसी उन सभी सेलर्स को मौका देती है, जो अपनी चाय को अच्छी कीमतों पर बेचना चाहते हैं. बढ़िया चाय की हमेशा अच्छी मांग होती है और खरीदार हमेशा अच्छी कीमत चुकाने को तैयार होते हैं.'

मंगलवार को बने इस रिकॉर्ड से पहले पिछला रिकॉर्ड माइजान ऑर्थोडोक्स गोल्डन टी टिप्स का था, जो 31 जुलाई को 70,501 रुपये प्रति किलो की दर पर बिका था. माइजान ऑर्थोडोक्स गोल्डन टी को हाथ से पीसा जाता है और धूप में सुखाया जाता है.

क्या है इस गोल्डन बटरफ्लाई टी की खूबी

इस चाय का उत्पादन सबसे पहले ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ जिले के ऊपरी असम में दिकोम टी एस्टेट में ही किया गया था. इसका उत्पादन रोसेल टी कंपनी द्वारा किया जाता है. इसके पहले हरमट्टी गोल्ड टी 22,000 रुपये किलो और मनोहारी गोल्ड टी 50,000 रुपये किलो बिक चुकी है. इस प्रकार के स्पेशि‍यलिटी टी का उत्पादन बहुत सीमित मात्रा में किया जाता है.

इसका नाम साल 2012 में लंदन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर से आने वाले कुछ लोगों ने रखा था. जब पहली बार इस चाय को उगाया गया तो बागान में तितलियों का झुंड देखा गया. इस चाय का उत्पादन बहुत ही सावधानी और ध्यान के साथ कुछ सॉफ्ट गोल्डन टिप्स से ही हो पाता है. इसलिए इस चाय का नाम गोल्डन बटरफ्लाई रखा गया.

जून के सिर्फ एक हफ्ते में उत्पादित करने पर ही इस चाय की क्वालिटी सबसे अच्छी आती है और इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि हर साल इसका उत्पादन हो ही. इसका स्वाद काफी मधुर कैरामेल (भुने हुए शक्कर) की तरह होता है. इसको पीने के बाद जो मिठास मिलती है वह अपने तरह की विशिष्ट होती है. इस क्वालिटी के महज 8 किलो चाय का उत्पादन हुआ है और इसमें से अभी सिर्फ एक किलो चाय की बिक्री की गई.

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