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मनाली या गोवा में लेना चाहते हैं हॉलिडे होम, को-ओनरशिप से कम पैसे में बनें लग्जरी घर के मालिक

रियल एस्टेट में को-ओनरशिप का चलन तेजी से बढ़ रहा है, यह एक ऐसा मॉडल है जो पारंपरिक संपत्ति खरीदने के तरीके को बदल रहा है. यह न सिर्फ आर्थिक रूप से समझदारी भरा विकल्प है.

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फेवरेट डेस्टिनेशन पर खरीदें लग्जरी घर  (Photo: AI-generated)
फेवरेट डेस्टिनेशन पर खरीदें लग्जरी घर (Photo: AI-generated)

क्या आप अपने फेवरेट हॉलिडे डेस्टिनेशन, शिमला, मनाली, ऊटी या गोवा में एक घर चाहते हैं? लेकिन पैसे और उसकी देखभाल की झंझट से बचना चाहते है? तो आप हॉलिडे होम्स की को- ओनरशिप पर विचार कर सकते हैं. हॉलिडे होम्स की को ओनरशिप का मतलब है कि आप एक हॉलिडे होम के हिस्सेदार बन सकते हैं. वैसे ये हॉलिडे होम्स पहाड़ी इलाकों में या समुद्र तट के पास होते हैं, जैसे गोवा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल.  

हॉलिडे होम खरीदना कई लोगों का सपना होता है, लेकिन इसे खरीदना महंगा और मुश्किल हो सकता है. ऐसे में, को-ओनरशिप (Co-ownership) एक नया और उभरता हुआ ट्रेंड बनकर सामने आया है. यह एक ऐसा मॉडल है, जहां कई लोग मिलकर एक हॉलिडे होम खरीदते हैं और उसे आपस में बांटकर इस्तेमाल करते हैं. यह कॉन्सेप्ट न सिर्फ हॉलिडे होम के मालिक बनने के सपने को पूरा करता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद होता है. को-ओनरशिप में, आप प्रॉपर्टी के एक हिस्से के कानूनी मालिक होते हैं और आपके पास इसे बेचने या विरासत में देने का अधिकार होता है.

को-ओनरशिप कैसे काम करती है?

को-ओनरशिप मॉडल को आमतौर पर एक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी या टेक आधारित प्लेटफॉर्म द्वारा मैनेज किया जाता है. पहले, मैनेजमेंट कंपनी या प्लेटफॉर्म एक आकर्षक हॉलिडे होम चुनती है, जो किसी लोकप्रिय जगह जैसे गोवा, लोनावाला, मनाली या उदयपुर में स्थित हो सकता है. यह प्रॉपर्टी पूरी तरह से फर्निश्ड होती है और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होती है. पूरी प्रॉपर्टी को कुछ हिस्सों में बांट दिया जाता है, जैसे 1/8 या 1/12 हिस्सा. इसका मतलब है कि एक घर को 8 या 12 लोग मिलकर खरीद सकते हैं. ग्राहक अपनी पसंद के हिस्से को खरीदते हैं और पूरी खरीद प्रक्रिया के बाद वे उस प्रॉपर्टी के कानूनी मालिक बन जाते हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होती है और सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज, जैसे सेल डीड और शेयरहोल्डर एग्रीमेंट, तैयार किए जाते हैं

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हर मालिक को साल के दौरान प्रॉपर्टी का उपयोग करने के लिए निश्चित दिनों का कोटा मिलता है. यह कोटे को तय करने के लिए एक शेड्यूलिंग सिस्टम होता है, जो आमतौर पर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या मोबाइल ऐप के जरिए काम करता है. कंपनियां हर मालिक को हर साल एक निश्चित संख्या में रातें आवंटित करती हैं, जिसे वे अपनी सुविधानुसार बुक कर सकते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि सभी मालिकों को समान मौका मिले.

कौन करता है प्रॉपर्टी का रखरखाव? 

प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी घर का रखरखाव, बिल भुगतान, सफाई और अन्य सभी जरूरी काम संभालती है, इसके बदले में, सभी मालिकों से एक मासिक या वार्षिक फीस ली जाती है.

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को-ओनरशिप के फायदे?

सबसे बड़ा फायदा ये है कि एक पूरे हॉलिडे होम को खरीदने की जगह, आप सिर्फ उसका एक हिस्सा खरीदते हैं, जिससे आपकी लागत बहुत कम हो जाती है. यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है, जो महंगी प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते हैं. इस मॉडल में, आप प्रॉपर्टी के वास्तविक मालिक होते हैं, न कि सिर्फ उसके इस्तेमाल के अधिकार के धारक, सभी कानूनी प्रक्रियाएं पारदर्शी होती हैं, जिससे आपका निवेश सुरक्षित रहता है.

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को-ओनरशिप में प्रॉपर्टी का रखरखाव, प्रबंधन और बिल भुगतान की ज़िम्मेदारी मैनेजमेंट कंपनी की होती है. आपको सिर्फ इसका इस्तेमाल करना है. को-ओनरशिप के तहत मिलने वाले हॉलिडे होम्स आमतौर पर लग्जरी होते हैं, आप कम लागत में एक शानदार घर का मालिक बन सकते हैं और उसका अनुभव ले सकते हैं. वहीं जैसे-जैसे प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, आपके निवेश का मूल्य भी बढ़ता है. आप जब चाहें अपने हिस्से को बेच सकते हैं और मुनाफा कमा सकते हैं.

 

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