रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को सेंट पीटर्सबर्ग में एक बड़े आर्थिक कार्यक्रम में खुलकर कहा कि दुनिया अब धीरे-धीरे डॉलर और यूरो से दूर हो रही है. उनका कहना था कि पश्चिमी देशों ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए बाकी दुनिया अब नया रास्ता ढूंढ रही है.
राष्ट्रपति पुतिन सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के एक बड़े सेशन में बोल रहे थे. इस सेशन को आजतक की संवाददाता गीता मोहन ने मॉडरेट किया. उन्होंने यहां पश्चिमी देशों की आर्थिक व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा.
पुतिन का मुख्य कहना क्या था?
राष्ट्रपति पुतिन बोले कि अमेरिका और यूरोप ने अपने डॉलर और यूरो की ताकत को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है. जब किसी देश से उन्हें कोई नाराजगी हुई तो उन्होंने उस देश का पैसा रोक दिया, उसके बैंक खाते फ्रीज कर दिए, उसे पेमेंट सिस्टम से बाहर कर दिया.
राष्ट्रपति पुतिन का कहना था कि यह देखकर दुनिया के बाकी देश डर गए हैं और सोच रहे हैं कि हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है.
रूस के पैसे फ्रीज होने वाला मोड़
राष्ट्रपति पुतिन ने खास तौर पर यह बात उठाई कि यूक्रेन के मामले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के अरबों रुपए बाहर जमा थे, वो सब फ्रीज कर दिए.
राष्ट्रपति पुतिन बोले कि यही वो पल था जब पूरी दुनिया को समझ आया कि डॉलर और यूरो पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. उनके शब्दों में, "पलक झपकते" किसी भी देश का पैसा रोका जा सकता है.
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तो अब क्या हो रहा है?
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अब दुनिया के देश धीरे-धीरे अपनी-अपनी करेंसी यानी अपने देश के पैसे में कारोबार करने लगे हैं. रूस खुद अब अपने एक्सपोर्ट्स का करीब 65 फीसदी हिस्सा रूबल यानी अपनी करेंसी में तय करता है. इसके अलावा डिजिटल करेंसी और नए पेमेंट सिस्टम्स का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है.
BRICS की बढ़ती ताकत
राष्ट्रपति पुतिन ने ब्रिक्स देशों की बात भी की. ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं.
राष्ट्रपति पुतिन बोले कि पिछले पांच साल में दुनिया की कुल आर्थिक बढ़त का 49 फीसदी हिस्सा ब्रिक्स देशों से आया है. और अगर खरीदने की ताकत के हिसाब से देखें तो अभी ब्रिक्स दुनिया की 40 फीसदी इकोनॉमी है.
व्यापार के रास्ते भी बदल रहे हैं
राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी कहा कि अब सामान लाने-ले जाने के रास्ते भी बदल रहे हैं. दुनिया का कारोबार अब पूरब और दक्षिण की तरफ ज्यादा जा रहा है. उन्होंने उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर और ट्रांस-आर्कटिक परिवहन मार्ग जैसे नए रास्तों का जिक्र किया जो पश्चिमी देशों से होकर नहीं जाते.
बड़ी तस्वीर क्या है?
राष्ट्रपति पुतिन का पूरा भाषण एक बात पर टिका था कि दुनिया में अब एक ही ताकत का राज नहीं रहेगा. अमेरिका और यूरोप जो ग्लोबल सिस्टम चला रहे हैं, उसकी पकड़ कमजोर हो रही है. और यह टूटन अब रुकने वाली नहीं है.
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