डोनबास का इलाका रूस का, यू्क्रेन को सुरक्षा की गारंटी... सीजफायर पर ट्रंप का नया फॉर्मूला

अमेरिका ने यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के लिए डोनबास क्षेत्र को रूस को सौंपने और बदले में यूक्रेन को मजबूत सुरक्षा गारंटी देने का प्रस्ताव रखा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि डोनबास छोड़ने से न केवल यूक्रेन की सुरक्षा कमजोर होगी, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा.

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सीजफायर के लिए दबाव डाल रहा है अमेरिका: जेलेंस्की का दावा (File Photo- ITG) सीजफायर के लिए दबाव डाल रहा है अमेरिका: जेलेंस्की का दावा (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है. इसके तहत डोनबास का पूरा इलाका रूस को सौंपने के बदले यूक्रेन को मजबूत सुरक्षा गारंटी दी जाएंगी. जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि डोनबास छोड़ने से न सिर्फ यूक्रेन की सुरक्षा कमजोर होगी, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा भी प्रभावित होगी, क्योंकि इस क्षेत्र में यूक्रेन की मजबूत रक्षात्मक ताकत रूस के हाथ लग जाएंगी. 

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यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में ये खुलासा किया है. उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने सुरक्षा गारंटी के बदले डोनबास क्षेत्र को रूस के हवाले करने की शर्त रखी है.

उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच यूक्रेन-रूस युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए कीव पर भारी दबाव डाल रहा है. इस साल अबू धाबी और जिनेवा में त्रिपक्षीय वार्ता के तीन दौर हो चुके हैं, लेकिन डोनबास की वापसी और सुरक्षा के वित्तपोषण पर पेच फंसा हुआ है. जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि डोनबास से पीछे हटना न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए बड़ा समझौता होगा.

अमेरिका पर दबाव डालने का आरोप

जेलेंस्की के अनुसार, मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान संकट का असर राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों पर पड़ रहा है. ट्रंप अब चार साल पुराने इस युद्ध को तेजी से खत्म करने की रणनीति अपना रहे हैं. जेलेंस्की ने कहा कि दुर्भाग्य से अमेरिकी पक्ष अब यूक्रेन पर अधिक दबाव डालने की रणनीति अपना रहा है. उनका मानना है कि ट्रंप का रुख काफी व्यावहारिक है और वो किसी भी कीमत पर जल्द शांति चाहते हैं.

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जेलेंस्की की चिंताएं

यूक्रेनी नेता ने सुरक्षा गारंटी डॉक्यूमेंट्स को लेकर दो मुख्य चिंताएं जताई हैं. पहली ये कि यूक्रेन की सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए हथियारों की खरीद का वित्तपोषण कौन करेगा? दूसरा सवाल ये है कि भविष्य में यदि रूस फिर से आक्रामकता दिखाता है तो सहयोगी देश वास्तव में किस तरह से प्रतिक्रिया देंगे?  जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी की आवश्यकता है, ताकि रूस दोबारा युद्ध शुरू न कर सके.

रूस की रणनीति

उधर, रूस के राष्ट्रपति पुतिन पूरे डोनबास पर नियंत्रण को अपना प्रमुख टारगेट मानते हैं. हालांकि, पिछले दो वर्षों में रूसी सेना की प्रगति काफी धीमी रही है. सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन ने डोनबास के उन 6,000 वर्ग किमी क्षेत्र में शहरों की 'किलेबंदी' की हुई है, जिसे रूस अभी तक नहीं जीत पाया है.

जेलेंस्की ने सवाल उठाया कि क्या रूस इस छोटे से इलाके के लिए अपने लाखों सैनिकों की बलि देने को तैयार है?.

जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ अपने पिछले मतभेदों को दरकिनार करते हुए कहा कि वह कोई 'चॉकलेट बॉक्स' या 'कार' नहीं हैं, जिसे कोई पसंद या नापसंद करे. उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय विवादों और सुरक्षा गारंटी के मुद्दों को सुलझाने का एकमात्र तरीका ट्रंप, पुतिन और उनके बीच होने वाली एक शिखर वार्ता ही है. उनका मानना है कि इस तरह की सीधी बातचीत से ही अंतिम शांति समझौता संभव हो पाएगा.

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ट्रंप के जताया आभार

ईरान युद्ध के कारण मांग बढ़ने के बावजूद जेलेंस्की ने पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति जारी रखने के लिए ट्रंप प्रशासन का आभार जताया. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ये आपूर्ति उतनी बड़ी नहीं है, जितनी यूक्रेन को जरूरत है. कीव अब अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोनों का उत्पादन बढ़ा रहा है, ताकि रूसी शहरों पर जवाबी हमला किया जा सके. रूस इस उम्मीद में है कि शांति वार्ता टलने पर वाशिंगटन की दिलचस्पी खत्म हो जाएगी.

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