ईरान जंग के बाद होर्मुज में पहली बार अमेरिकी जहाजों की एंट्री, दो युद्धपोतों ने किया ट्रांजिट

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार दो अमेरिकी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं. अमेरिकी सेना ने बताया कि ये कदम क्षेत्रीय तनाव कम करने और ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए अहम है.

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ईरान ने होर्मुज पर पाबंदी लगाई हुई है. (Photo: AP) ईरान ने होर्मुज पर पाबंदी लगाई हुई है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:56 AM IST

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था. उसके बाद से इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी लग गई थी. लेकिन अब युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अमेरिका के दो युद्धपोत गुजरे हैं.

अमेरिकी सेना सेंटकॉम ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी दी. सेना ने बताया कि USS फ्रैंक ई. पीटरसन (डीडीजी 121) और USS माइकल मर्फी (डीडीजी 112) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ट्रांजिट किया.

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सेना ने ये भी खुलासा किया कि इन जहाजों ने अरब की खाड़ी में एक बड़े मिशन के हिस्से के रूप में काम किया. ताकि स्ट्रेट ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर की पहले से बिछाई गई समुद्री खानों से पूरी तरह से मुक्त है.

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की मानें तो अमेरिका स्ट्रेट से माइंस हटा रही है. इन सुरंगों को पूरी तरह से हटाकर अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए एक सुरक्षित रास्ता बहाल करने की कोशिश की जा रही है. बता दें कि ये जलमार्ग दुनिया भर के तेल व्यापार के लिए लाइफलाइन माना जाता है.

माइंस हटाने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'हम अब होर्मुज को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं. इस तरह चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, जर्मनी और कई अन्य देशों सहित दुनिया भर के देशों पर एहसान कर रहे हैं. क्योंकि उनमें ये काम खुद करने का हिम्मत नहीं है.'

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यह भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट से माइंस हटाने का प्रोसेस शुरू, हम दुनिया भर के देशों पर कर रहे एहसान: ट्रंप

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. इस मार्ग को पूरी तरह खोलने से न सिर्फ ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने में भी मदद मिलेगी.

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल

दूसरी तरफ, पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, जो कि फेल हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानी जिसकी वजह से समझौता नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि अब उनकी टीम अमेरिका वापस जा रही है. 

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