US Election: जब टीवी पर 'मेकअप' न करने की वजह से राष्ट्रपति चुनाव हारे प्रत्याशी!

अमेरिका में इस साल तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान होगा. डोनाल्ड ट्रंप के सामने डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इस बीच अमेरिकी चुनाव से जुड़ा ये किस्सा आप जरूर पढ़ें.

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी (फोटो: https://www.jfklibrary.org/) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी (फोटो: https://www.jfklibrary.org/)

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

  • अमेरिका में शुरू हुआ राष्ट्रपति पद का चुनाव
  • तीन नवंबर को अमेरिका में डाले जाएंगे वोट
  • 1960 में शुरू हुआ था टीवी डिबेट्स का सिलसिला

अमेरिका में इस वक्त राष्ट्रपति पद के चुनाव चल रहे हैं और प्रत्याशी एक दूसरे को हराने में जुटे हुए हैं. भारत की तरह ही अमेरिका में भी चुनावों के दौरान कई ऐसे किस्से होते हैं जो यादगार हो जाते हैं और इन किस्सों की वजह से कई बार चुनावी नतीजों पर फर्क भी पड़ता है और एक राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनाव हार सकता है. इन्हीं में से एक किस्सा आता है साल 1960 के चुनाव का, जब पहली बार अमेरिकी चुनाव में टीवी डिबेट्स अहम रोल में आई थी और इन्हीं टीवी डिबेट्स के कारण एक उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था.

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अमेरिका और रूस के बीच चल रही कोल्ड वॉर के दौरान साल 1960 के चुनाव हुए. तब यह चुनाव जॉन एफ कैनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच हुआ. डेमोक्रेट्स की तरफ से जॉन एफ कैनेडी उम्मीदवार बने जो एक युवा नेता थे और अमेरिकी लोगों के बीच अपनी एक नई पहचान बना रहे थे, वहीं रिचर्ड निक्सन उपराष्ट्रपति रह चुके थे और राष्ट्रपति पद के लिए हाथ आजमा रहे थे.

यह वही वक्त था जब अमेरिकी नागरिकों के घरों में टीवी की संख्या बढ़ रही थी. 1950 के आसपास करीब 11 फ़ीसदी अमेरिकी नागरिकों के घर में टीवी था, लेकिन 1960 का चुनाव आते-आते ये संख्या 80 फीसदी पहुंच गई. यही वजह है कि इस चुनाव को पहला विजुअल चुनाव माना जाता है.

बीमार निक्सन और टीवी का मेकअप!

चुनाव से कुछ समय पहले जब टीवी डिबेट्स शुरू हुईं तो उस वक्त रिचर्ड निक्सन अस्पताल में थे. काफी वक्त तक वह अस्पताल में रहे, बीमार थे, उनका चेहरा ऐसा नहीं था कि वह लाखों की भीड़ के सामने आ सकें. उनके चेहरे से साफ लगता था कि वो एक बीमार और थके हुए इंसान हैं. बस यही कैनेडी के लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि उन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि वोटर एक 'बीमार राष्ट्रपति' स्वीकार नहीं कर पाए.

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अमेरिकी सरकार की आर्काइव्स और वहां की मीडिया कवरेज में इस बात का जिक्र है कि रिचर्ड निक्सन का बीमार होना उनके चुनाव के लिए काफी नुकसान देह रहा. क्योंकि 26 सितंबर 1960 तक कुल 4 टीवी डिबेट्स हुई थी इन्हें 70 मिलियन लोगों ने देखा था.

और उस लिहाज से जो दिखा वह यह था कि एक तरफ जॉन एफ कैनेडी एक जवान लड़का जिसके पास कुछ प्लान है वह आगे आ रहा है और एक बीमार व्यक्ति जो थका सा है वह अपनी बात कह रहा है.

फोटो क्रेडिट: NY यूनिवर्सिटी

इससे इतर रेडियो पर भी कुछ डिबेट्स होती थीं, लेकिन निक्सन अपने अनुभव की वजह से कैनेडी से आगे निकल पाते थे लेकिन क्योंकि टीवी फैल चुका था इसलिए उसका असर ज्यादा रहा. 8 नवंबर 1960 को जब नतीजा आया तो कैनेडी 119000 वोटों से जीत गए थे, रिचर्ड निक्सन चुनाव हार चुके थे. अमेरिकी इतिहास में इसे टीवी डिबेट्स का पहला चुनाव दर्ज किया गया.

सभी राज्यों में मिलाकर कैनेडी को 34226771 वोट मिले और निक्सन को 34108157 वोट मिले.

जॉन एफ कैनेडी अमेरिका के सबसे युवा राष्ट्रपतियों में से एक थे, 1961 में जब उन्होंने शपथ ली तो 20वीं सदी में जन्मे वो पहले राष्ट्रपति थे. इसके साथ ही वो पहले कैथोलिक राष्ट्रपति भी थे, चुनाव के दौरान उन्हें कैथोलिक होने का काफी फायदा भी मिला. हालांकि, कैनेडी का ये सफर लंबा नहीं चल पाया और 2 साल बाद ही उनकी हत्या कर दी गई.

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22 नवंबर, 1963 को जब कैनेडी अपनी पत्नी के साथ खुली गाड़ी में निकले तो सड़क पर हजारों की भीड़ थी. तभी किसी ने भीड़ में से गोली चलाई, पहली सिर में लगी और एक गले में, बस यहीं अमेरिका के सबसे चहेते राष्ट्रपति के जीवन का अंत हो गया.

(सभी जानकारी https://www.jfklibrary.org/ और अमेरिकी सरकार की आर्काइव्स https://archive.org/ से ली गईं हैं.)

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