अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला तो कर दिया लेकिन उन्हें उम्मीद भी नहीं थी कि इस्लामिक देश इतनी तीव्रता के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा. अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान ने अपने कई शीर्ष नेताओं को खोया है लेकिन उसका हौसला पस्त नहीं हुआ और वो इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है. अब खबर है कि ट्रंप के करीबी सहयोगियों में से कुछ लोग ईरान के खिलाफ युद्ध के फैसले को लेकर पछता रहे हैं.
Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के कई करीबी ईरान के खिलाफ जंग के फैसले पर पछता रहे हैं. उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरानी शासन की मजबूती को कम आंका था.
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख अधिकारी ईरान के खिलाफ ऑपरेशन को शुरू करने से पहले हिचकिचा रहे थे या और समय चाहते थे. एक सूत्र ने बताया कि ट्रंप ने अपने अधिकारियों की हिचकिचाहट को नजरअंदाज किया और कहा था, 'मैं बस इसे करना चाहता हूं.'
'ट्रंप अपनी ही कामयाबी के नशे में थे'
सूत्र ने यह भी कहा कि हाल की सैन्य सफलताओं से ट्रंप काफी उत्साहित थे, जिनमें पिछले साल ईरान पर हमले और जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी शामिल है. इसी वजह से उन्होंने यह मान लिया कि बिना जमीनी सैनिकों के भी वो ईरानी शासन को गिरा सकते हैं.
सूत्र ने कहा, 'वो अपनी ही कामयाबी के नशे में थे.'
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस समय ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट में एक ऐसे जाल में फंस गए हैं जहां से निकलना मुश्किल होता जा रहा है. यह एक ऐसा जाल है जिसमें मजबूत पक्ष अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए लगातार हमले करता रहता है, भले ही उसे फायदे की जगह नुकसान हो रहा हो.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की दखलअंदाजी से भी ट्रंप सीख नहीं रहे और स्थिति का आकलन नहीं कर रहे बल्कि वो अपनी जिद पर अड़े हुए हैं.
ईरान के पलटवार ने अमेरिका की उम्मीदों पर फेरा पानी
ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चार से छह हफ्ते चलेगा. लेकिन अब अमेरिका और सहयोगी देशों को लग गया है कि ईरान को हराना इतना आसान नहीं है और यह संकट लंबा चलने वाला है. तीन सूत्रों ने बताया कि यह युद्ध सितंबर तक जारी रह सकता है, भले ही संघर्ष की तीव्रता कम हो जाए.
अमेरिका-इजरायल के हमले 28 फरवरी को शुरू हुए थे और रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें करीब 1,300 लोगों की मौत हो चुकी है. इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों की भी जान गई है. ईरान के खिलाफ जंग शुरू होने के बाद से 14 अमेरिकी सेवा सदस्यों की मौत हो चुकी है.
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