ट्रंप-नेतन्याहू के शुरू किए युद्ध की असल कीमत चुका रहा UAE! झेल रहा सबसे ज्यादा ईरानी हमले

अमेरिका और इजरायल के शुरू किए युद्ध में यूएई बुरी तरह पिस रहा है. ईरान ने इजरायल से ज्यादा हमले यूएई पर किए हैं. इन हमलों से यूएई के 'सुरक्षित' होने की छवि को भारी नुकसान हुआ है.

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अमेरिका-इजरायल के शुरू किए जंग की कीमत यूएई चुका रहा है (Photo: Reuters) अमेरिका-इजरायल के शुरू किए जंग की कीमत यूएई चुका रहा है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले से पहले ही ईरान ने वॉर्निंग दी थी कि अगर उस पर हमला किया गया तो इसका खामियाजा पूरे मध्य-पूर्व को भुगतना होगा. लेकिन अमेरिका और इजरायल ने या तो इस वॉर्निंग को बहुत हल्के में लिया या फिर उन्हें लगा कि वो ईरान के हमलों का रिस्क उठा सकते हैं. युद्ध शुरू होने के 13वें दिन अब खाड़ी के अरब देश इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं, और उनमें सबसे अधिक प्रभावित संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) है.

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यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से 10 मार्च तक देश की ओर 1,700 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे जा चुके हैं. इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा को इंटरसेप्टर मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों की मदद से मार गिराया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि ईरान ने जिस तरीके से अपने अरब पड़ोसियों पर हमले किए हैं, यह उनके लिए चौंकाने वाला रहा है.

रविवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि वो अपनी लगभग 60 प्रतिशत सैन्य ताकत पड़ोसी अरब देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और यूएस के रणनीतिक हितों को निशाना बनाने में लगा रहा है, जबकि बाकी हमले इजरायल की ओर किए जा रहे हैं.

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खाड़ी में अब तक सबसे ज्यादा हमले यूएई पर हुए हैं, जो शायद इजरायल से भी ज्यादा हैं, जबकि युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजरायल ने की थी, यूएई ने कोई हमला नहीं किया. यूएई पर ईरान की कई मिसाइलें और ड्रोन घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में घरों, दफ्तरों और सड़कों पर गिरे हैं, जिनमें चार लोगों की मौत हुई है. मरने वाले सभी नागरिक थे.

दुबई ही क्यों निशाने पर?

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर फवाज गर्गेस कहते हैं, 'दुबई वैश्वीकरण का एक बड़ा केंद्र है. ईरानी नेता दुबई को पश्चिमी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की बुनियाद के रूप में देखते हैं. यहां हमला करने से सिर्फ दुबई या यूएई ही नहीं, बल्कि पूरी विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है.'

एक और अहम बात- धारणा भी इस युद्ध में अहम भूमिका निभा रही है. दुबई के किसी अंतरराष्ट्रीय होटल के सामने आग की तस्वीरें या दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर में हमला होने की खबरें दुनिया भर का ध्यान खींच रही हैं. इसके बाद हजारों विदेशी नागरिक और पर्यटक यूएई छोड़ रहे हैं.

गुरुवार को दुबई के बीचों-बीच हुए एक विस्फोट ने यूएई को हिलाकर रख दिया. डाउनटाउन दुबई में दुनिया की मशहूर इमारत बुर्ज खलीफा और विशाल दुबई मॉल के पास धमाके हुए. अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन हमला हुआ जिसके बाद रिहायशी इलाके से धुआं उठता दिखाई दिया.

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अधिकारियों का कहना है कि हालात को जल्दी ही काबू में कर लिया गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

इन हमलों में भले ही कोई हताहत या घायल नहीं हो रहा लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक असर काफी बड़ा दिख रहा है.

गर्गेस इस बात की विडंबना भी बताते हैं कि जब ईरान दुनिया के सबसे कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा था, तब सालों तक यूएई ही ईरान के लिए आर्थिक सहारा बना रहा. एक यूएई अधिकारी ने कहा कि भविष्य में ईरान के साथ संबंध सामान्य हो सकते हैं, लेकिन भरोसा दोबारा बनने में दशकों लग सकते हैं.

ईरान के साथ यूएई के व्यापारिक रिश्ते मजबूत हैं

यूएई ईरान का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. अमेरिका ने ईरान पर दशकों से प्रतिबंध लगा रखे हैं, बावजूद इसके ईरान-यूएई के व्यापारिक संबंध बढ़े हैं. विश्व व्यापार संगठन के अनुसार 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 28 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.

करीब पांच लाख ईरानी नागरिक यूएई में रहते हैं.

ईरान का कहना है कि वो यूएई पर इसलिए हमले कर रहा है क्योंकि यह अमेरिका का दशकों पुराना रणनीतिक सहयोगी है. पिछले साल अमेरिका ने यूएई को 'मेजर डिफेंस पार्टनर' का दर्जा दिया था.

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यूएई ने अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम पर दसियों अरब डॉलर खर्च किए हैं, जो अब ईरान के ताबड़तोड़ हमलों से देश की रक्षा में लगे हुए हैं.

यूएई पर हमला कर ईरान दुनिया को क्या बताना चाहता है?

चैथम हाउस की विशेषज्ञ सनम वकील का कहना है कि यूएई पर हमला कर ईरान दुनिया को कई संदेश देना चाहता है.

उनके मुताबिक, 'यूएई पर हमला करके ईरान न सिर्फ अमेरिका के एक अहम साझेदार को निशाना बना रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि ऐसा देश भी सुरक्षित नहीं है जहां दुनियाभर से लाखों लोग आकर रहते हैं और जो ग्लोबल फाइनेंस, एविएशन और व्यापार का बड़ा केंद्र है.'

ईरान के इतने बड़े पैमाने पर हमले ये भी बताते हैं कि वो इस युद्ध को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहा है और किसी भी तरह से वो एक इस्लामिक देश के रूप में बचे रहना चाहता है.

ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले साल जून में जब इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और बाद में अमेरिका भी इसमें शामिल हो गया था, तब ईरान की प्रतिक्रिया सीमित रही थी. उसने केवल कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदैद एयरबेस पर हमला किया था. कहा जाता है कि इस हमले की जानकारी ईरान ने पहले से ही कतर को दे दी थी.

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उस हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कतर को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देने का आदेश भी जारी किया था.

यूएई पर ईरान के भीषण हमलों के लिए भौगोलिक कारण भी अहम

ईरान और यूएई के बीच समुद्र की दूरी केवल करीब 100 किलोमीटर है. इसलिए मिसाइलों और ड्रोन को यूएई तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता.

गर्गेस कहते हैं, 'असल में यह बिल्कुल पड़ोस में है. दुबई और यूएई पर हमला करना जॉर्डन या इजरायल जैसे देशों की तुलना में आसान है, क्योंकि इजरायल के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम है.'

यूएई ने पहले ही साफ कर दिया था कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में वो अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देगा. उसके इस साफ रुख के बावजूद भी ईरान ने उस पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं.

यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने पिछले वीकेंड घायलों से मुलाकात की और देश के दुश्मनों को चेतावनी देते हुए कहा, 'यूएई की बाहरी छवि देखकर भ्रम में मत रहिए. हमारा देश मजबूत है और हम आसान शिकार नहीं हैं.'

ईरानी हमलों से गुस्से में यूएई के लोग

शुरुआत में ईरान ने जब सबसे ज्यादा हमले यूएई पर शुरू किए तो वहां के लोगों को झटका लगा था. वो अब ईरानी हमलों को लेकर बेहद गुस्से में हैं.

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यूएई के अखबार 'द नेशनल' की संपादक 'मीना अल-ओरैबी' कहती हैं, 'युद्ध शुरू होने की सुबह बहुत से लोग इस बात से नाराज थे कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला करना चुना है. लेकिन जैसे ही ईरान ने यूएई और दूसरे देशों पर हमले शुरू किए, लोगों का गुस्सा और अन्याय की भावना ईरान पर शिफ्ट हो गया.'

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वीकेंड में माफी मांगते हुए कहा था कि ईरान अब अपने पड़ोसियों को निशाना नहीं बनाएगा. इससे कुछ समय के लिए उम्मीद जगी, लेकिन जल्द ही फिर से ईरान के हमले शुरू हो गए जिससे यूएई और अन्य खाड़ी देश खतरा महसूस कर रहे हैं.

इन सबसे इतर, युद्ध के बीच भी दुबई में एक अलग ही नजारा दिख रहा है. दुबई के समुद्र तटों पर धूप सेंकते पर्यटक और विदेशी लोग बेफिक्र जी रहे हैं. वो नहीं चाहते कि जिस युद्ध में वो शामिल नहीं वो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाले.

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