कश्मीर मसले पर ट्रंप के दखल देने की संभावना नहीं : अमेरिकी विशेषज्ञ

शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ लीसा कर्टिस के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनल्ड ट्रंप के दखल देने की संभावना नहीं के बराबर है.

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डोनाल्ड ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प

खुशदीप सहगल

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  • 02 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप के दखल देने की संभावना नहीं के बराबर है. यह मानना है शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ लीसा कर्टिस का. कर्टिस के मुताबिक ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे भारत के साथ संबंधों को और मजबूत बनाने में दिलचस्पी रखते

हेरिटेज फाउंडेशन से जुड़ीं कर्टिस ने 'द डेली सिग्नल' में एक लेख में कहा. 'असल में, अगर के लिए दो परमाणु ताकत संपन्न प्रतिद्वंद्वियों में तनाव घटाने के लिए कोई सार्थक भूमिका है, तो वो है पाकिस्तान पर इस बात के लिए दबाव डालना कि वह अपनी जमीन पर खुलेआम ऑपरेट करने वाले भारत विरोधी आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे.' कर्टिस ने कहा है कि ट्रंप के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ फोन पर बात करने को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं. साथ ही इसे उपमहाद्वीप में ट्रंप की भावी नीतियों से जोड़ कर देखा जा रहा है.

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बता दें कि पाकिस्तान ने एक बयान में कहा है कि ट्रंप ने नवाज के साथ फोन पर बात में पेशकश की कि वह पाकिस्तान के लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए 'कोई भी' भूमिका निभाने के लिए तैयार है. पाकिस्तान ने यहां तक दावा कर दिया कि इस पेशकश का मुख्य मकसद मुद्दे से जुड़ा था. कर्टिस ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों को अनौपचारिक दोस्ताना बातचीत के तौर पर देखा जाना चाहिए जो आम तौर पर किसी भी विदेशी नेता के साथ की जाती है. कर्टिस के मुताबिक इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि पाकिस्तानी नेता शिष्टाचार और गर्मजोशी से हुए उपरोक्त वार्तालाप का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेंगे और इसे कश्मीर को लेकर भारत-पाक विवाद पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के अपने अजेंडे को बढ़ाने की कोशिश करेंगे.

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कर्टिस ने कहा कि भारत-पाक रिश्तों को लेकर अमेरिका कैसे निपटता है, यह नाजुक मामला है. कर्टिस के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों के लिए यह अहम है कि वे मध्यस्थता के जाल में ना फंसे. साथ ही ऐसे किसी भ्रम में भी ना आएं कि अमेरिका खुद ही 70 साल पुराने इस विवाद को निपटा सकता है. उरी समेत भारतीय सेना के कई शिविरों पर हाल में हुए हमलों को लेकर कर्टिस ने कहा कि ये कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के लिए पाकिस्तान की व्यग्रता है. कर्टिस ने कहा कि अमेरिका को दिखाना चाहिए कि इस तरह का बर्ताव अस्वीकार्य है और इनके गंभीर नतीजे हो सकते हैं.

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