NO, NO, NO, NO... चार दोस्तों ने ट्रंप को दे दिया गच्चा, होर्मुज पर पड़ गए अकेले!

होर्मुज में सुरक्षा के नाम पर युद्धपोत भेजने की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अपील को जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगियों ने ठुकरा दिया है. इन देशों ने स्पष्ट किया है कि वे इस सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे.

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4 खास देशों ने द्वारा मांग ठुकराए जाने के बाद ट्रंप 'होर्मुज' पर अकेले पड़ गए. (Photo-Agency) 4 खास देशों ने द्वारा मांग ठुकराए जाने के बाद ट्रंप 'होर्मुज' पर अकेले पड़ गए. (Photo-Agency)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है. ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी में दुनिया की महाशक्तियां और उनके पुराने सहयोगी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली. 

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दरअसल, ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से अपील की थी कि वे भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज तैनात करें. 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है और यहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की आपूर्ति होती है. ट्रंप का तर्क था कि चूंकि इन देशों का तेल और व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इनकी ही होनी चाहिए. ट्रंप ने ट्वीट किया था, "दुनिया के बाकी देश अपने जहाजों की सुरक्षा खुद क्यों नहीं करते? हम सालों से उनकी रक्षा कर रहे हैं."

जापान का दो टूक जवाब
सबसे बड़ा झटका टोक्यो से लगा. जापान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज में किसी भी तरह के समुद्री सुरक्षा अभियान (Maritime Security Operations) पर विचार नहीं कर रही है.

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जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि उन्हें अभी तक अमेरिका से आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अपनी नौसेना भेजना संभव नहीं है. जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान और खाड़ी देशों पर निर्भर है, ऐसे में वह अमेरिका के लिए ईरान से सीधे टकराव मोल लेने के मूड में नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी खींचे हाथ
ऑस्ट्रेलिया, जिसे प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे वफादार साथी माना जाता है, उसने भी ट्रंप की मांग को ठुकरा दिया है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया कि वे होर्मुज में अपना युद्धपोत नहीं भेजेंगे. वहीं, दक्षिण कोरिया ने थोड़ी कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया लेकिन मंशा साफ कर दी. सियोल ने कहा कि वे इस अनुरोध की 'बारीकी से समीक्षा' करेंगे, लेकिन फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है.

ट्रंप की रणनीति हमेशा 'अमेरिका फर्स्ट' की रही है, लेकिन होर्मुज संकट में उनकी यह रणनीति उन पर ही भारी पड़ती दिख रही है. ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों ने भी इस अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने से परहेज किया है. वे नहीं चाहते कि अमेरिका की ईरान नीति के चक्कर में वे किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध का हिस्सा बन जाएं.

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेत है. जिस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां सुरक्षा के नाम पर ट्रंप का साथ देने के लिए कोई भी अपना युद्धपोत जोखिम में डालने को तैयार नहीं है.

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