सीरिया: असद का केमिकल वेपन विद्रोहियों के हाथ, जोलानी बोले- इस्तेमाल नहीं करेंगे लेकिन रखेंगे

सीरिया में बशर अल असद की सरकार गिरने के बाद हजारों सीरियाई सैनिक इराक की सीमा में दाखिल हो चुके हैं. इराकी सुरक्षाबल उनकी मेजबानी कर रहे हैं.

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(फोटो: मेटा एआई) (फोटो: मेटा एआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:29 AM IST

सीरिया इस समय भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. तख्तापलट के बाद बशर अल असद अपने परिवार समेत रूस में शरण ले चुके हैं. मोहम्मद अल बशीर को तीन महीने के लिए सीरिया का नया केयरटेकर प्रधानमंत्री बनाया गया है. इस बीच देश के सबसे बड़े विद्रोही नेता अबू मोहम्मद अल जोलानी ने ताबड़तोड़ बड़े फैसले लिए हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही संगठन हयात तहरीर अल शाम के चीफ जोलानी ने बशर अल असद की सेना को भंग कर दिया है.

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सीरिया में बशर अल असद की सरकार गिरने के बाद हजारों सीरियाई सैनिक इराक की सीमा में दाखिल हो चुके हैं. इराकी सुरक्षाबल उनकी मेजबानी कर रहे हैं. सीरिया से सटे इराक ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.

वहीं, जोलानी ने देश की कई कुख्यात जेलों को बंद करने का फैसला लिया है. इन जेलों में बंद कैदियों को रिहा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि बशर अल असद ने इन जेलों में बड़े पैमाने पर अपने विद्रोहियों को बंद कर रखा है. 

सीरिया के केमिकल हथियारों का क्या होगा?

सीरिया के केमिकल हथियारों को लेकर हमेशा से कमोबेश की स्थिति बनी रहती है. लेकिन बशर अल असद के देश छोड़ देने के बाद से यह आशंका जताई जा रही थी कि रासायनिक हथियारों का क्या होगा.

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लेकिन अब जोलानी ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में इन केमिकल हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे लेकिन इन्हें अपने संरक्षण में रखेंगे. इसे लेकर वह संभावित साझेदारों से चर्चा भी कर सकते हैं. 

उन्होंने कहा कि वह संभावित केमिकल वेपन्स डिपो पर करीब से नजर रखेंगे और इन्हें सुरक्षित रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ कॉर्डिनेट करेंगे. जोलानी ने कहा कि वह देश में एक ऐसी सरकार का गठन करेंगे, जो टेक्नोलॉजी फ्रेंडली होगी. सीरिया में टेक्नोलॉजी को प्रमुखता दी जाएगी. 

सीरिया के केमिकल वेपन्स विवादों में?

सीरिया के केमिकल वेपन्स को लेकर वैश्विक स्तर पर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में कहा गया है कि सीरिया में कई स्थानों पर केमिकल वेपन्स का इस्तेमाल नागरिकों के खिलाफ किया गया है. 

सीरिया के केमिकल वेपन्स की शुरुआत का इतिहास 1925 के जेनेवा प्रोटोकॉल तक है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के केमिकल और बायोलॉजिकल वेपन्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात करता है. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सीरिया में केमिकल हथियारों के उपयोग की निंदा की है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की है.

बता दें कि 27 नवंबर को सीरिया पर पहला हमले से लेकर रविवार को राजधानी दमिश्क में कब्जे तक 11 दिनों के भीतर राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया. होम्स से लेकर इदलिब, अलेप्पो, हमा, दर्रा और राजधानी दमिश्क तक में विद्रोही अपने झंड़े गाड़ चुके हैं.

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उत्तर पश्चिमी सीरिया में इदलिब प्रांत विद्रोहियों का एक प्रमुख गढ़ है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से तहरीर अल-शाम नामक समूह के नियंत्रण में है, जो पूर्व में अल-नुसरा फ्रंट के रूप में जाना जाता था. यह समूह अल-कायदा से जुड़ा हुआ था. इसके साथ ही दक्षिणी सीरिया के  क्वुनैतरा जैसे इलाकों में भी कुछ विद्रोही समूह सक्रिय हैं.

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