पुतिन दिसंबर में आएंगे भारत, टैरिफ टेंशन के बीच बढ़ेगा रणनीतिक महत्व

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ सकते हैं, जो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी. यह दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीद जारी रखने को लेकर 50% तक टैरिफ बढ़ा दिया है.

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पुतिन ने मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार किया था (File Photo: AP) पुतिन ने मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार किया था (File Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ सकते हैं. ये दौरा ऐसे समय होने जा रहा है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखने के कारण कड़े टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकी दी है.

समाचार एजेंसी AFP ने क्रेमलिन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि पुतिन ने मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था, लेकिन तारीख तय नहीं हो पाई थी. अब यह यात्रा दिसंबर में होने की संभावना जताई गई है. पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात इससे पहले 1 सितंबर को चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में होगी.

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पुतिन की ये भारत यात्रा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार होगी. इसलिए इसे बदलते वैश्विक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

भारत और अमेरिका के रिश्तों में बढ़ा तनाव

ट्रंप ने हाल ही में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया है. अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है. भारत ने इन आरोपों और टैरिफ को अनुचित और दोहरे मापदंड करार दिया है. सरकार ने साफ किया कि तेल खरीद पूरी तरह बाज़ार आधारित है और इसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं. भारत ने यह भी कहा कि यूरोप समेत कई बड़े देश आज भी रूस से व्यापार कर रहे हैं. रूस ने भी अमेरिका के कदम को अनुचित बताया और कहा कि अगर भारतीय सामान अमेरिका नहीं जाएगा, तो रूस में उसकी मांग बढ़ेगी.

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पुतिन की यात्रा में क्या होगा अहम?

दिसंबर में होने वाली इस यात्रा के एजेंडे में ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सहयोग प्रमुख रहेंगे. रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है और सोवियत काल से ही दोनों देशों के रिश्ते बेहद करीबी रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह यात्रा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगी और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में नई दिशा देगी.

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