गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए ट्रंप ने पुतिन को भी दिया न्योता

क्रेमलिन ने कहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'गाजा शांति बोर्ड' में शामिल होने का न्योता मिला है. रूस इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

Advertisement
गाजा पीस प्लान के लिए पुतिन के अलावा भारत और पाकिस्तान को भी न्योता मिला है. (File Photo: ITG) गाजा पीस प्लान के लिए पुतिन के अलावा भारत और पाकिस्तान को भी न्योता मिला है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:32 PM IST

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने जानकारी दी है कि रूस इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं पर स्टडी कर रहा है और स्पष्टीकरण के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क करेगा. यह बोर्ड गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिस पर अक्टूबर में दोनों पक्ष सहमत हुए थे. 

Advertisement

अमेरिका ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी इस बोर्ड का हिस्सा बनने का न्योता भेजा है. वॉशिंगटन इसे शांति और स्थिरता लाने वाले एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में देख रहा है. 

हालांकि, रूस के सरकारी चैनल ने इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिद्वंद्वी के रूप में एक अमेरिकी प्रयास बताया है, जिसका जनादेश अधिक व्यापक हो सकता है.

पुतिन और अन्य वैश्विक नेताओं को निमंत्रण

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से कहा, "पुतिन को मिले प्रस्ताव पर अभी विचार चल रहा है." 

गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को भी इस निकाय में शामिल होने के लिए अमेरिका से प्रस्ताव मिले हैं. अमेरिका इस बोर्ड के जरिए दुनिया के प्रभावशाली देशों को एक मंच पर लाकर गाजा में स्थायी शांति स्थापित करना चाहता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या गाजा पट्टी की आड़ में UN को किनारे करने की तैयारी में हैं Trump, क्यों 'पीस बोर्ड' पर मचा बवाल?

रूस के सरकारी 'चैनल-1 टीवी' ने अपने राजनीतिक शो 'प्रयामोई एफिर' में इस बोर्ड को लेकर चर्चा की है. रूस इस गाजा शांति बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के तौर पर देख रहा है. जानकारों का मानना है कि अमेरिका एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय निकाय बनाना चाहता है, जिसका दायरा और अधिकार संयुक्त राष्ट्र से भी ज्यादा व्यापक हो, जिससे अन्य वैश्विक संघर्षों पर भी इसके जरिए नियंत्रण पाया जा सके.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »