पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के बीच यहां से हैरान करने वाले तराने सुनाई दे रहे हैं. ये वही गीत हैं जिन्हें भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल गाया करते थे. एक समय ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले बिस्मिल का तराना अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बगावत की आवाज बन गई है. ये तराना है- सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है. अमर क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की ये पंक्तियां आज फिर से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की गलियों और पहाड़ियों में गूंज रही हैं.
रावलकोट बस स्टैंड में हजारों लोग पहुंचे और एक साथ बिस्मिल के इन तरानों से विरोध के स्वर बुलंद किए. पठानी सूट पहने इस लड़के की आवाज पर जब घाटी के प्रदर्शनकारी समवेत स्वर में गाते हैं तो इसकी गूंज इस्लामाबाद से रावलपिंडी तक सुनाई देती है.
इस बीच ये लड़का गीत का दूसरा छोर शुरू करता है- है लिए हथियार दुश्मन, ताक में बैठा उधर... और तैयार हैं हम सीना लिए अपना इधर...
वक्त आने पर बता देंगे तुझे ऐ आसमां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हुए जमावड़े का मैसेज स्पष्ट है अब यहां की जनता आर-पास की जंग के लिए तैयार है.
गीत की कहानी
भारत के स्वतंत्रतता सेनानियों का अमरगीत सरफरोशी की तमन्ना... की रचना बिस्मिल अज़ीमाबादी ने की थी. उन्होंने इसे 1921-22 के आसपास जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद लिखी थी. राम प्रसाद बिस्मिल ने इसे इतना लोकप्रिय बनाया कि लंबे समय तक लोग इसे उन्हीं की रचना मानते रहे.
राम प्रसाद बिस्मिल इस गीत को क्रांतिकारी सभाओं, साथियों का उत्साह बढ़ाने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान अक्सर गुनगुनाते और सुनाते थे. यह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों का एक तरह का प्रेरणा गीत बन गया था.
सबसे प्रसिद्ध और भावुक कहानी 19 दिसंबर 1927 की है. जब राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी दी जा रही थी. कहा जाता है कि फांसी के तख्ते की ओर बढ़ते समय उनके होंठों पर इसी गीत की शुरुआती पंक्तियां थीं. इसके बाद यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अमर उद्घोष बन गया.
PoK में प्रदर्शन
इस वक्त पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई जगहों पर पाकिस्तान और पाक सेना के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं. इनमें रावलकोट, कोटली, झेलम घाटी, ददयाल, हजीरा जैसे इलाके शामिल हैं. हर जगह पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठ रही है.
पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन मुख्यतः राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक समस्याओं और सरकारी दमन को लेकर हो रहे हैं. लिया विरोध का बड़ा कारण विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों का विवाद है, जिसे स्थानीय लोग अपने राजनीतिक अधिकारों में हस्तक्षेप मानते हैं. सके अलावा आंदोलनकारी संगठन JAAC पर प्रतिबंध, नेताओं की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई से भी नाराज हैं.
5 जुलाई को ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं. इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से सर्कुलेट हो रहा है.
अब पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों ने भारत से मदद की गुहार लगाई है.
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के 26वें दिन सीनियर विरोध नेता सरदार अमन खान ने लाइन ऑफ़ कंट्रोल के पार और भारत के लोगों से सीधी अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले तीन हफ़्तों से इस इलाके में खाने और दवाओं की सप्लाई रोक दी है, जिससे यहां मानवीय संकट पैदा हो गया है.
रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में एक बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए खान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार लोगों की मांगों का जवाब गोलियों से देती रही, तो उनके पास दूसरे रास्ते भी हैं. अब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने प्रशासन को 8 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है. कमेटी ने कहा है कि यदि तय समय तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 8 जुलाई को धरनास्थल से आंदोलन के अगले चरण का ऐलान किया जाएगा और इसे ज्यादा व्यापक बनाया जाएगा.
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