PoK में बवाल, खैबर-बलूचिस्तान से लेकर अफगान सीमा तक उबाल... 4-फ्रंट पर घिरे मुनीर का क्या होगा?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जनाक्रोश, बलूचिस्तान में तेज होता विद्रोह, खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के हमले और अफगानिस्तान सीमा पर तनाव. सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान की सेना पहली बार एक साथ इतने मोर्चों पर घिर गई है?

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PoK प्रोटेस्ट आसिम मुनीर के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गई है. (Photo- ITG) PoK प्रोटेस्ट आसिम मुनीर के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गई है. (Photo- ITG)

एम. नूरूद्दीन

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

पाकिस्तान इन दिनों ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां हर तरफ से संकट उसके दरवाजे पर दस्तक देता दिखाई दे रहा है. एक तरफ उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बलोच आर्मी के हमले पहले से ज्यादा तेज बढ़ चुके हैं. उत्तर-पश्चिम में खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बना रहा है, जबकि अफगानिस्तान सीमा पर भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा.

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यही वजह है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के सामने अब सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि कई फ्रंट पर संकट खड़ा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान की सेना एक साथ इतने फ्रंट संभाल पाएगी या फिर यह मुनीर के लिए किसी बड़े एंडगेम की शुरुआत साबित हो सकता है?

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PoK में क्यों भड़का आंदोलन?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पैदा हुआ संकट उसके लिए नई चुनौती बनता जा रहा है. हालिया विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब PoK की सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा में 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को बरकरार रखने का फैसला दिया. इसके बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए.

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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक संवैधानिक विवाद नहीं है. इसके पीछे वर्षों की नाराजगी भी है. महंगी बिजली, आटे की कमी, विकास और राजनीतिक अधिकारों को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ती गई. हालात को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान प्रशासन ने जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के नेताओं को गिरफ्तार किया, संगठन पर प्रतिबंध लगाए, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और 16 हजार से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, झड़पों में 20 से ज्यादा लोगों की मौत की बात भी सामने आई है, जबकि प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद की तरफ लंबे मार्च का ऐलान किया है. विश्लेषकों का कहना है कि पहले PoK में प्रदर्शन खासतौर से बिजली, महंगाई और स्थानीय प्रशासन जैसे मुद्दों तक सीमित थे. लेकिन अब कुछ समूह पाकिस्तान से ज्यादा स्वतंत्रता की मांग भी उठाने लगे हैं. 

बलूचिस्तान में क्यों बढ़ रहा संकट?

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कई अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सबसे बड़ा कारण पानी का गंभीर संकट, कथित जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) और बढ़ती हिंसा है. कई इलाकों में लोग पानी की कमी और सरकारी लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. वहीं बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की बरामदगी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके अलावा हालिया हथियारबंद समूहों के हमलों में पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों की मौत के बाद उनके परिजन भी बेहतर सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए सबसे संवेदनशील इलाकों में रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालात और बिगड़े हैं. रणनीतिक मामलों के जानकारों का दावा है कि पाकिस्तान सरकार का नियंत्रण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित होता जा रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में हथियारबंद समूहों की एक्टिविटी लगातार बढ़ रही हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों, राजमार्गों और सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर रहे हैं. जाफर एक्सप्रेस पर हुए कई हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. इतना ही नहीं, चीन के निवेश वाली कई परियोजनाओं पर भी सुरक्षा संकट का असर देखने को मिल रहा है. रेको डिक जैसे बड़े माइनिंग प्रोजेक्ट को लेकर भी सुरक्षा चिंताएं सामने आई हैं.

अगर पाकिस्तान में हालात ऐसे रही रहते हैं तो इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी कमजोर होगी. चीन समेत विदेशी निवेशकों के आगे भी पाकिस्तान बेबस हो जाएगा, जिसका सीधा और गंभीर असर पाकिस्तान की पहले से डगमगाती अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

खैबर पख्तूनख्वा बना तीसरा मोर्चा

उधर पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी इलाका भी लगातार अशांत बना हुआ है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार हमले कर रहा है. अफगानिस्तान सीमा पर भी तनाव बना हुआ है. पाकिस्तान को एक तरफ बलूच विद्रोहियों से लड़ना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ टीटीपी भी सेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. यानी सेना को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दोनों तरफ से लगातार संसाधन लगाने पड़ रहे हैं.

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खैबर पख्तूनख्वा (KPK) क्षेत्र के अलावा अफगानिस्तान सीमा भी पाकिस्तान के लिए लगातार बड़ी सुरक्षा चुनौती बनी हुई है. यहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमले लगातार बढ़े हैं, जबकि अफगान तालिबान के साथ सीमा पर तनाव और झड़पों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. तालिबान लगातार पाकिस्तान पर दबाव बनाए हुआ है. यहां तक कि कुछ मोर्चों पर लड़ाई भी छिड़ी है.

क्या भारत की तरफ ध्यान भटका सकता है पाकिस्तान?

पीओके में बवाल और बलूचिस्तान में उबाल के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अपने घरेलू संकट से ध्यान हटाने के लिए भारत के साथ तनाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है. कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के इतिहास में ऐसे उदाहरण रहे हैं. जैसे कि पाकिस्तान में जब भी हालात खराब हुए हैं, उसने भारत के साथ तनाव पैदा किया है. अब तो हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान सिंधु के पानी को हथियार बनाने की कोशिश में जुटा है. अब ये देखने वली बात होगी कि पाकिस्तान और उसका आर्मी चीफ आसिम मुनीर आने वाले समय में क्या कदम उठाता है.

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