JAAC क्या है, जिसके सदस्यों को दबाने के लिए PAK आर्मी PoK में बरसा रही है गोलियां

पाक अधिकृत कश्मीर में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बढ़ती महंगाई, बिजली दरों और स्थानीय अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू किया है. पाकिस्तान सेना ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई की है.

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POK में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया है POK में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और खूनखराबे की सनसनखेज घटना सामने आई है. यहां बीते हफ्ते से जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का पाकिस्तान, पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. जिसके दमन के लिए पाक आर्मी ने हिंसक रवैया अपनाया है. JAAC का आरोप है कि पाक आर्मी और सुरक्षाबलों ने उन पर ताबड़तड़ गोलियां बरसाई हैं.

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सवाल है कि JAAC आखिर क्या है और पाकिस्तानी सेना से इसका संघर्ष क्यों हो रहा है? 

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का गठन सितंबर 2023 में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में बढ़ती महंगाई, बिजली दरों, गेहूं-आटे की कीमतों और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर हुआ था. यह किसी एक नेता या राजनीतिक दल का संगठन नहीं, बल्कि व्यापारियों, वकीलों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों, छात्रों और विभिन्न नागरिक संगठनों का संयुक्त मंच है.

सितंबर 2023 में विभिन्न जनआंदोलनों को एकजुट कर 30 सदस्यीय कोर कमेटी बनाई गई, जिसने क्षेत्रीय स्तर पर आंदोलन का नेतृत्व संभाला. JAAC ने सस्ती बिजली, गेहूं पर सब्सिडी, प्रशासनिक सुधार, स्थानीय अधिकारों की रक्षा और राजनीतिक विशेषाधिकारों में कटौती सहित कई मांगें उठाईं. 2024 में महंगाई और बिजली संकट के खिलाफ बड़े प्रदर्शनों के बाद यह संगठन पूरे PoK में प्रभावशाली जनआंदोलन के रूप में उभरा.

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अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान सरकार और PoK प्रशासन के साथ हुए मुजफ्फराबाद समझौते में इसकी कई मांगें स्वीकार की गईं, लेकिन संगठन का आरोप है कि समझौते को पूरी तरह लागू नहीं किया गया, जिसके कारण हालिया विरोध प्रदर्शन फिर तेज हो गए हैं.

असल में PoK में जो मौजूदा अशांति फैली है उसकी जड़ में अक्टूबर 2025 में हुआ यही ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ माना जा रहा है. यह समझौता पाकिस्तान सरकार, PoK प्रशासन और JAAC के बीच पिछले वर्ष हुए हिंसक आंदोलनों के बाद हुआ था. उस समय लगातार विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के बीच सरकार ने कई महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार करने का वादा किया था. समझौते के तहत गेहूं और बिजली पर सब्सिडी, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा, प्रशासनिक सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों को मजबूत करने जैसी घोषणाएं की गई थीं.

उस समय इस समझौते को PoK में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और राजनीतिक शिकायतों के समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता माना गया था.

JAAC का आरोप- वादे पूरे नहीं हुए

अब JAAC का आरोप है कि समझौते में किए गए अधिकांश वादे या तो पूरे नहीं किए गए हैं या फिर उन्हें आंशिक रूप से लागू किया गया है. संगठन का कहना है कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद संरचनात्मक सुधारों, सब्सिडी, सार्वजनिक सेवाओं, स्थानीय अधिकारों और विकास परियोजनाओं पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई.

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इसी कारण संगठन ने 9 जून से पूरे क्षेत्र में हड़ताल और नए आंदोलन का आह्वान किया था. JAAC का कहना है कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार टालमटोल करती रही, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ता गया. हालांकि पाकिस्तान के अफसरों का दावा अलग है. सरकारी पक्ष का कहना है कि JAAC की अधिकांश मांगों को पहले ही स्वीकार किया जा चुका है. लेकिन स्थानीय स्वायत्तता, आरक्षित विधानसभा सीटों, राजनीतिक विशेषाधिकारों और दीर्घकालिक सब्सिडी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं.

क्या हैं JAAC की मांगें?

रोटी के लाले (आटे पर सब्सिडी): पाकिस्तान की कंगाली का असर यहां सबसे ज्यादा दिख रहा है. आटे और गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं. लोग मांग कर रहे हैं कि उन्हें आटे पर सब्सिडी दी जाए.

नेताओं की अय्याशी: एक तरफ आम जनता दाने-दाने को तरस रही है, दूसरी तरफ पाकिस्तानी हुक्मरान और वहां के अफसर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं. इसी वीआईपी कल्चर के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है.

खूनी संघर्ष का पुराना इतिहास: पाकिस्तान और PoK के बीच का रिश्ता हमेशा से 'आका और गुलाम' जैसा रहा है. यह खूनी संघर्ष कोई नया नहीं है, इसका एक लंबा इतिहास है. 

संसाधनों का शोषण: पाकिस्तान दशकों से PoK के पानी, जंगलों और पहाड़ों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करता आया है, लेकिन बदले में वहां के लोगों को सिर्फ गरीबी, बेरोजगारी और बदहाली मिली है.

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बंदूक के दम पर आजादी का दमन: जब भी वहां का कोई नागरिक अपने हक या स्वायत्तता (Self-rule) की बात करता है, पाकिस्तानी सेना उसे 'गद्दार' या 'देशद्रोही' बताकर गायब कर देती है या जेल में डाल देती है.

कठपुतली सरकार: PoK की विधानसभा में 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए रिजर्व रखी गई हैं जो पाकिस्तान के शहरों (जैसे लाहौर, कराची) में रहते हैं. इन सीटों का इस्तेमाल करके इस्लामाबाद में बैठी सरकार हमेशा PoK में अपनी पसंद की 'कठपुतली सरकार' चुनती है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाज दब जाती है.

रावलकोट और मुजफ्फराबाद में इंटरनेट पूरी तरह बंद है, ताकि वहां चल रहे जुल्म की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें. पूरे इलाके में धारा 144 लागू है. डैमेज कंट्रोल के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आनन-फानन में करोड़ों रुपये के पैकेज का ऐलान किया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कह दिया है कि जब तक उनकी सभी 38 मांगें पूरी नहीं होतीं और फौज वापस नहीं जाती, यह आंदोलन नहीं रुकेगा.

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