प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया स्थित प्रम्बानन मंदिर पहुंचे. उनकी इस यात्रा के साथ ही एक बड़ी तस्वीर सामने आई है कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में साझा सभ्यतागत विरासत को फिर से जिंदा करने का काम किया है.
बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, नेपाल, कंबोडिया, लाओस, बहरीन और श्रीलंका जैसे कई देशों में भारत ने ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनर्निर्माण में मदद की है.
बांग्लादेश में 1971 में पाकिस्तान के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान तबाह हुए रामना काली मंदिर को भारत सरकार की मदद से फिर से बनाया गया और 2021 में इसका उद्घाटन हुआ. इसके अलावा 2020 में नाटोर के लगभग 300 साल पुराने जॉय काली माता मंदिर का पुनर्निर्माण भी भारत सरकार के अनुदान से हुआ. साथ ही आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर की मरम्मत में भी भारत ने सहयोग दिया.
वियतनाम में 2014 में समझौता होने के बाद भारत ने यूनेस्को की सूची में शामिल मी सोन मंदिर परिसर को फिर से संवारा, जो दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे महत्वपूर्ण शैव मंदिरों में गिना जाता है.
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म्यांमार में 2017 में समझौते के बाद भूकंप से क्षतिग्रस्त बागान क्षेत्र के 12 ऐतिहासिक पैगोडा की मरम्मत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने की और आनंद मंदिर का पुनर्निर्माण भी पूरा किया.
नेपाल में भूकंप के बाद भारत ने 5 करोड़ डॉलर की मदद से 28 सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का जीर्णोद्धार शुरू किया, जिसमें सेतो मछिंद्रनाथ मंदिर भी शामिल है. कंबोडिया में 2022 से भारत ने अंगकोर हेरिटेज क्षेत्र के ता प्रोहम, अंगकोर वाट और प्रीह विहियर जैसे हिस्सों का संरक्षण किया.
लाओस में 2024 में करीब 1000 साल पुराने शिव मंदिर वाट फू का जीर्णोद्धार हुआ. बहरीन में 2019 में पीएम मोदी ने मनामा के 200 साल पुराने श्रीनाथजी मंदिर के पुनर्विकास का उद्घाटन किया, जिसकी लागत 42 लाख डॉलर थी.
श्रीलंका में 2015 में भारत ने तिरुकेतीश्वरम मंदिर की मरम्मत के लिए 32 करोड़ 60 लाख श्रीलंकाई रुपये देने का समझौता किया था.
प्रणय उपाध्याय