'कोरोना में हमने वन अर्थ, वन हेल्थ का मंत्र दिया', गुयाना की संसद में बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और मानवता फर्स्ट का सिद्धांत होना चाहिए. हमने दिखाया है कि डेमोक्रेसी हमारे डीएनए में हैं. हमारे आचार-व्यवहार में है. लोकतंत्र हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है. हमने कोरोना में वन अर्थ, वन हेल्थ का मंत्र दिया.

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गुयाना की संसद को संबोधित करते पीएम मोदी गुयाना की संसद को संबोधित करते पीएम मोदी

aajtak.in

  • गुयाना,
  • 21 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 9:23 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों गुयाना के दौरे पर हैं, इस दौरान उन्होंने गुयाना की संसद को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और गुयाना ने एक जैसी गुलामी और संघर्ष देखा. आजादी की लड़ाई में यहां (गुयाना) में भी और भारत में भी कई लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया. जब आजाद हुए तब परिस्थितियां बहुत अलग थीं. दोनों देश आज लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं. लोकतंत्र और मानवता फर्स्ट का सिद्धांत होना चाहिए. हमने दिखाया है कि डेमोक्रेसी हमारे डीएनए में हैं. हमारे आचार-व्यवहार में है. लोकतंत्र हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है. 

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पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर सहयोग करें, स्थानीय स्तर पर कार्य करें. उन्होंने कहा कि भारत कहता है कि हर राष्ट्र मायने रखता है. यह ग्लोबल साउथ के जागरण का समय है, एक साथ मिलकर एक नई ग्लोबल व्यवस्था बनाने का समय है. हम द्वीप राष्ट्रों को छोटे देशों के रूप में नहीं, बल्कि बड़े महासागर देशों के रूप में देखते हैं. पीएम मोदी ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि ये संघर्ष का समय नहीं है. अंतरिक्ष से लेकर समुद्र तक, यह सार्वभौमिक सहयोग का विषय होना चाहिए. 

प्रधानमंत्री मोदी ने गुयाना की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि हम कभी भी स्वार्थ, विस्तारवादी दृष्टि से आगे नहीं बढ़े हैं और न ही संसाधनों को हड़पने की कोई भावना रखी है. हमने दिखाया है कि लोकतंत्र हमारे डीएनए, दृष्टि और कार्यों में है. 'लोकतंत्र फर्स्ट, ह्यूमैनिटी फर्स्ट' की भावना के साथ भारत 'विश्व बंधु' के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि हमने कोरोना के वक्त 'वन अर्थ, वन हेल्थ' का मंत्र दिया. 

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इस दौरान पीएम मोदी ने गुयाना की संसद में कहा कि मैं आप सभी को भारत आने के लिए आमंत्रित करता हूं. उन्होंने कहा कि 24 साल पहले, मैं इस खूबसूरत देश की संस्कृति और विरासत के बारे में जानने के लिए एक जिज्ञासु व्यक्ति के रूप में गुयाना आया था. भारत-गुयाना के बीच मिट्टी के रिश्ते हैं, जो सौहार्दपूर्ण हैं. 

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